Published on 2019-11-30
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(डॉ. चिन्मय जी, देवपूजन के समय)

आज समाज में विकृतियों ने विकराल रूप ले लिया है और यज्ञ से विकृतियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। यज्ञ का मूल उद्देश्य देवत्व को धारण करना है। यज्ञ से संस्कार विकसित होते हैं। संस्कारों से जीवन में उच्च विचारों का समावेश होता है।

गायत्री महामंत्र महानता के अवतरण का मन्त्र है जिससे जीवन में उच्चता,उत्कृष्टता के साथ उत्थान की दिशा में क़दम बढ़ते हैं। आप उन मशालों की तरह हैं जो विपरीत परिस्थितियों में समाज को दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। आप साधारण मानव नहीं, महामानव हैं। आप उस शक्ति के संवाहक हैं जिसने युग परिवर्तन की जिम्मेदारी लेते हुए युग निर्माण योजना की शुरूआत की है।


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11 जनवरी, देहरादून। उत्तराखंड ।

दिनांक 11 जनवरी 2020 की तारीख में देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉक्टर चिन्मय पंड्या जी देहरादून स्थित ओएनजीसी ऑडिटोरियम में उत्तराखंड यंग लीडर्स कॉन्क्लेव 2020 कार्यक्रम में देहरादून पहुंचे जहां पर उन्होंने उत्तराखंड राज्य के विभिन्न.....

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ज्ञानदीक्षा समारोह में लिथुआनिया सहित देश के 12 राज्यों के नवप्रवेशी विद्यार्थी हुए दीक्षित

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