Published on 2019-11-30
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(डॉ. चिन्मय जी, देवपूजन के समय)

आज समाज में विकृतियों ने विकराल रूप ले लिया है और यज्ञ से विकृतियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। यज्ञ का मूल उद्देश्य देवत्व को धारण करना है। यज्ञ से संस्कार विकसित होते हैं। संस्कारों से जीवन में उच्च विचारों का समावेश होता है।

गायत्री महामंत्र महानता के अवतरण का मन्त्र है जिससे जीवन में उच्चता,उत्कृष्टता के साथ उत्थान की दिशा में क़दम बढ़ते हैं। आप उन मशालों की तरह हैं जो विपरीत परिस्थितियों में समाज को दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। आप साधारण मानव नहीं, महामानव हैं। आप उस शक्ति के संवाहक हैं जिसने युग परिवर्तन की जिम्मेदारी लेते हुए युग निर्माण योजना की शुरूआत की है।


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ऑनलाइन पुंसवन संस्कार

दिनांक ०३.०८.२०२० को शिकागो, USA निवासी श्रीमती प्रज्ञा व् श्री अविनाश का पुंसवन संस्कार शांतिकुंज हरिद्वार द्वार          डा. गायत्री शर्मा व् उनकी टीम द्वारा कराया गया ......

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प्राणायाम का वैज्ञानिक प्रभाव

दिनांक ३०.०७.२०२० को डाक्टर सी. पी. त्रिपाठी जी, ऋषिकेश  द्वारा डाक्टरों और गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं हेतु आयोजित वेबिनार  को संबोधित करती हुई डाक्टर गायत्री शर्मा, शांतिकुंज हरिद्वार |.....

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