Published on 2019-12-13

हरिपुर कलॉ, देहरादून। उत्तराखण्ड

स्वामी दयानंद सरस्वती मेरे पितापुल्य मार्गदर्शक थे। उनके तप और वर्तमान संचालक स्वामी हंसानंद जी के पुरुषार्थ का ही प्रभाव है कि आज भी जब मैं उनके ऋषिकेश स्थित आश्रम जाता हूँ तो वैसा ही आत्मिक आनन्द अनुभव करता हूँ जैसा कि उनके प्रत्यक्ष सान्निध्य में मिलता था। गंगा फिर से पहले की तरह निर्मल हो, यह स्वामी दयानंद जी का स्वप्न था। गायत्री परिवार गंगा की 2525 किलोमीटर की पूरी लम्बाई पर स्वच्छता और जनजागरूकता का अभियान चला रहा है। हम उनका सपना साकार करके रहेंगे।

श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने 3 नवम्बर को नवनिर्मित एम फॉर सेवा बालिका छात्रावास का उद्घाटन समारोह में यह विचार व्यक्त किए। एम फॉर सेवा (आॅल इण्डिया मूवमेण्ट फॉर सेवा) ब्रह्मलीन स्वामी दयानंद जी के ट्रस्ट द्वारा संचालित है। यह देव संस्कृति विश्वविद्यालय के निकट ही हरिपुर कलाँ, जिला देहरादून में बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि इसमें रहने वाली अनेक छात्राएँ गायत्री विद्यापीठ में ही पढ़ने आती हैं।

उद्घाटन समारोह में स्वामी साक्षात्कृत्यानंद जी, श्री रवि मल्होत्रा, ट्रस्टी एम फॉर सेवा, श्रीमती शीला बालाजी अध्यक्ष तथा मैनेजिंग ट्रस्टी तथा स्वामी हंसानन्द सरस्वती, संयोजक मुख्य रूप से उपस्थित थे।

छात्रावास के निर्माण पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्रद्धेय ने कहा कि स्वामी दयानंद जी का सपना महामानवों को गढ़ने का था। इसके लिए जीवन विद्या को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। विद्या वह होती है जो विकाररहित जीवन जीना सिखाती है।

हमें उत्तराखण्ड शासन की ओर से इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए देव संस्कृति विश्वविद्यालय रूपी सौगात मिली है। आज जहाँ अन्य शिक्षण संस्थान मनी मेकिंग इण्डस्ट्रीज़ के रूप में काम करते दिखाई देते है, वहीं देसंविवि ने मैन मेकिंग के अपने उद्देश्य में शानदार सफलता प्राप्त की है।


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