Published on 2019-12-14
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असरौल, जयपुर। राजस्थान

पेशा तो बिजली के सामान की दुकान थी, लेकिन परम पूज्य गुरुदेव के विचारों का रंग चढ़ा तो जीवन की दिशा ही बदल गई। नाम है श्री भैरूलाल सैनी, जिन्होंने अपने ज्ञान, समय, प्रतिभा और साधन सबकुछ गुरुसत्ता को समर्पित कर दिया। लिखावट अच्छी थी, सो विचार क्रान्ति का एक अत्यंत प्रभावशाली माध्यम उन्होंने चुना, गाँव- गाँव दीवार लेखन का। दुकान का काम अधिकतर बच्चों को ही सौंप दिया है और स्वयं चल पड़े हैं भगवान के कार्यों में साझेदारी करने।

अलवर में आयोजित 108 कुण्डीय यज्ञ के प्रयाज क्रम में 66 वर्षीय श्री सैनी जी से भेंट हुई। उन्होंने बताया कि वे 25 वर्ष पहले मिशन से जुड़े और पिछले 20 वर्षों से दीवार लेखन का अनवरत कार्य कर रहे हैं। अब तक वे 500 से अधिक गाँवों में सद्वाक्य लेखन कर चुके हैं, हर गाँव में औसतन 25 सद्वाक्य उनके द्वारा लिखे गये हैं।

कठूमर के यज्ञ में श्री सैनी ने शीघ्र ही 1008 गाँवों में दीवार लेखन का संकल्प पूरा कर लिए जाने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अब कार्य की गति कई गुना बढ़ गई है। जहाँ भी बड़े कार्यक्रम होते हैं, उनके प्रयाज में वे अनेक गाँवों में सद्वाक्य लिखने के अभियान में जुट जाते हैं। वे पंजाब, उड़ीसा और गुजरात तक में जाकर गाँवों में दीवार लेखन कर आये हैं।


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