Published on 2019-12-27
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देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग ने लम्बे अर्से की शोध के बाद एक ऐसे पैमाने निर्माण करने में सफलता पाई है जिसके सहारे वैवाहिक और अवैवाहिक जीवन में सामंजस्य बिठाने को लेकर आ रही समस्याओं का निदान ढूँढ़ा जा सकता है। इसके लिए छ: वर्ष तक एक हजार से अधिक लोगों के साथ आपसी विचार, व्यवहार, पारिवारिक संबंध, सामंजस्य सहित विभिन्न समस्याओं पर अध्ययन किया और इसके बाद ही हल निकालने का प्रयास किया। इसके निर्माण में देसंविवि की छात्रा कुमारी आयुषी सबरवाल ने अथक परिश्रम किया। उसके नेतृत्व में बनी इस स्केल को भारत की प्रसाद साइको कार्पोरेशन, नई दिल्ली ने प्रकाशित कर इसमें पक्की मुहर लगाई है।

उल्लेखनीय है कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय का मनोविज्ञान विभाग विचार, व्यवहार, मन, संबंध, सामजस्य एवं वर्तमान की अनेक समस्याओं पर कार्य कर रहा है। विभाग के विद्यार्थी इस क्षेत्र में विशेष योगदान दे रहे हैं। इसी कड़ी में पूर्व छात्रा ‘आयुषी’ ने दाम्पत्य जीवन एवं अवैवाहिक जीवन की समस्याओं व उसके निदान पर कार्य किया।

इस पैमाने के अधार पर उपरोक्त सम्बन्ध में जहाँ बारीकी से जानकारी प्राप्त की जा सकेगी, वहाँ समस्याओं के हल भी आसानी से किये जा सकेंगे। इससे वैवाहिक- अवैवाहिक दोनों की समस्याओं को सुलझाना सम्भव होगा। इस शोध- निष्कर्ष कार्य में मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी का विशेष योगदान है।

आयुषी की उपलब्धि पर देसंविवि के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी एवं श्रद्धेया शैल दीदी ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी तथा समस्त विवि परिवार ने भी आयुषी को शुभ कामनाएँ दीं। इसे पूरा कराने में विभाग के समवन्यक डा. सन्तोष विश्वकर्मा, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. स्वदेक भट्ट व डॉ. मनीष का सराहनीय योगदान रहा।


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