Published on 2020-01-11

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जो आचरण से शिक्षा दें वही आचार्य है और ऐसे आचार्यगण ही विद्यार्थियों को चरित्रवान बना सकते हैं। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जिस तरह चाणक्य ने अपने ज्ञान व चरित्र से शिक्षित कर अपने शिष्यों को भारतीय संस्कृति को विश्व के कोने-कोने में फैलाने के लिए भेजा था, उसी तरह देसंविवि के विद्यार्थी भारतीय संस्कृति एवं संस्कार के लिए समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि 2020 एक नई क्रांति लेकर आया है।

                समारोह के मुख्य अतिथि नगर विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि किसी समय तक्षशिला व नालंदा विश्वविद्यालय का जो स्वरूप हुआ करता था, उसी तरह आज देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का स्वरूप दिखाई देता है। यहाँ जो संस्कार मिलता है, उससे युवाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति रुझान पैदा होता है। श्री कौशिक ने कहा कि विश्वविद्यालय हमेशा बदलाव का केन्द्र रहा है। विश्वविद्यालयों के संस्कारों ने देश को नई दिशा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

                इससे पूर्व प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने ज्ञान दीक्षा समारोह की पृष्ठभूमि से अवगत कराया। कुलाधिपति ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों एवं आचार्यों को  शिक्षण कार्य एवं व्यक्तित्व विकास के साथ आगे बढ़ने का दीक्षा संकल्प दिलाया। समारोह के अतिथियों एवं कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को देसंविवि का प्रतीक चिह्न प्रदान किया। इस अवसर पर कुलाधिपति ने मुख्य अतिथि डॉ. धन सिंह रावत व नगर विकास मंत्री श्री कौशिक को स्मृति चिन्ह, एवं युगसाहित्य भेंटकर सम्मानित किया। समारोह के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि व कुलाधिपति ने ई-रेनासा, संस्कृति संचार, संस्कृति ट्रेवल साल्यूशन, एल्युमिनी एशोसिएशन का विमोचन किया।

                कुलसचिव बलदाऊ  देवांगन ने बताया कि देसंविवि के 36वें ज्ञानदीक्षा समारोह में छः मासीय पाठ्यक्रम- योग विज्ञान, धर्म विज्ञान एवं समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए लिथुआनिया सहित उत्तराखण्ड, बिहार, छग, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, हिमालच प्रदेश, झारखंड, मप्र, उप्र तथा पश्चिम बंगाल से आये नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को ज्ञानदीक्षा के सूत्र से दीक्षित किया गया। श्री उदय किशोर मिश्र ने ज्ञान दीक्षा का वैदिक कर्मकाण्ड तथा डॉ. गोपाल शर्मा ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर ऋषिकेश की मेयर अनिता ममगई, शांतिकुंंज व देसंविवि परिवार सहित विभिन्न राज्यों से आये गणमान्य लोग, एनसीसी कैडेट्स व अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी तथा पत्रकारगण उपस्थित रहे।


Write Your Comments Here:


img

विश्वविद्यालय ने शक्तिपीठ,लंका को साहित्य प्रदर्शनी के लिए किया आमंत्रित,प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में उमड़े विद्यार्थी

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=pfbid02d9i2apKibnvtMp6JLt7gvYy5xeYDc5pJpJmkmPTJK7Y9oqWeNbyj3jwgaW85m2dPl&id=100050487125471&sfnsn=wiwspmo&mibextid=RUbZ1f*31जनवरी, म.गां.काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय,वाराणसी।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺अधिक फोटो देखने के लिए फेसबुक लिंक पर क्लिक करें🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 मुझे ढूंढना है तो मेरे चित्र में नहीं,मेरे साहित्य में ढूंढो।मैं व्यक्ति नहीं विचार हूं।साहित्य.....

img

हजारों सृजन सैनिकों की उपस्थिति में संपन्न हुआ युगऋषि का आध्यात्मिक जन्मदिवस बसंत पर्व

26 जनवरी,गायत्री शक्तिपीठ,लंका। युगऋषि,वेदमूर्ति,तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के आध्यात्मिक जन्मदिवस बसंत पर्व संग गणतंत्र दिवस का अद्भुत संयोग* से हम सभी के उत्साह में गुणात्मक वृद्धि देखने को मिली।🌻🌻🌻🌻🌻इसी क्रम में *अपने मार्गदर्शक.....

img

गायत्री शक्तिपीठ लंका नारी जागरण प्रकोष्ठ ने स्नेहसलिला के जन्मशताब्दी वर्ष 2026 तक 1008 नई बहनों को तलाश तराश कर वंदनीय माताजी को हार रूप में पहनाने का लिया संकल्प

22 जनवरी, शक्तिपीठ, लंका। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में निरंतर युगऋषि के सपनों का शक्तिपीठ बनने की ओर अग्रसर व प्रयासरत गायत्री.....