Published on 2020-02-05
img

दीक्षा श्रद्धा और विश्वास के आरोपण का पर्व है। जिन सद्गुरुदेव प.पू. पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के साथ आपकी आत्मा का सम्बन्ध स्थापित होने जा रहा है वे सारे विश्व में गायत्री चेतना का विस्तार करने वाले सिद्ध साधक है। वे स्वयं गायत्री का ही रूप हैं। उनकी परम अनुकम्पा थी कि उन्होंने मुझे स्वयं को साक्षात् गायत्री के रूप में अनुभव कराया और दर्शन दिए हैं। ऐसे महान गुरु के साथ जुड़ जाना जीवन का परम सौभाग्य है। जो गुरु के बताये रास्ते पर चले, गुरु का काम करे, वही सच्चा शिष्य है। परम पूज्य गुरुदेव ने हमें दीक्षा के पाँच अनुबंध बताये हैं। उपासना :: अपने गुरु के, इष्ट के आदर्शों को, सत्प्रवृत्तियों को जीवन में उतारना। आज देश में 12 लाख से अधिक मंदिर हैं। उनके पुजारी अपने इष्ट के जैसे नहीं बन पाते, क्योंकि उनकी श्रद्धा अपने इष्ट के प्रति नहीं होती, उनकी लालसा धन के प्रति होती है। एक ही पुजारी थे- रामकृष्ण परमहंस, जिन्होंने अपना जीवन अपनी काली की इच्छाओं के अनुरूप चलाया ही नहीं, बल्कि पत्थर की प्रतिमा को जीती- जागती काली बना लिया।

साधना :: अपनी इच्छाओं को, अपनी आदतों को अपने वश में करने का नाम साधना है। साधना के लिए बाबाजियों के, मंदिरों के चक्कर में पड़ना जरूरी नहीं है, अपनी अंतरात्मा में देखिये, उसी से पूछिए, उसी को साधिए। जप, ध्यान, स्वाध्याय आदि से विचार संयम, आहार संयम, समय संयम, अर्थ संयम करना सीख लीजिए। आराधना :: राष्ट्र की समस्याओं के समाधान में योगदान देना आराधना है। आप गायत्री परिवार के रचनात्मक आन्दोलनों से जुड़कर समाज की बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं। अश्ांदान व समयदान :: स्वयं कीजिए, बच्चों में आदत डालिए। समय को भगवान के काम में लगाइये। साक्षा


Write Your Comments Here:


img

anganwadi स्कूल मैं जाके गायत्री मंत्र और गायत्री माँ के चम्त्कार् के बारे मैं बताया

मैं यशवीन् मैंने आज राजस्थान के barmer के बालोतरा मैं anganwadi स्कूल मैं जाके गायत्री माँ के बारे मैं बच्चों को जागरूक किया और वेद माता के कुछ बातें बताई और महा मंत्र गायत्री का जाप कराया जिसे आने वाले.....

img

युग निर्माण हेतु भावी पीढ़ी में सुसंस्कारों की आवश्यकता जिसकी आधारशिला है भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा -शांतिकुंज प्रतिनिधि आ.रामयश तिवारी जी

वाराणसी व मऊ उपजोन की *संगोष्ठी गायत्री शक्तिपीठ,लंका,वाराणसी के पावन प्रांगण में संपन्न* हुई।जहां ज्ञान गंगा की गंगोत्री,*महाकाल का घोंसला,मानव गढ़ने की टकसाल एवं हम सभी के प्राण का केंद्र अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज,हरिद्वार* से पधारे युगऋषि के अग्रज.....

img

Yoga Day celebration

Yoga day celebration in Dharampur taluka district ValsadGaytri pariwar Dharampur.....