Published on 2020-02-14
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भोपाल। मध्य प्रदेश
8 दिसम्बर 1993 में भोपाल के विशाल जम्बूरी मैदान में अश्वमेध महायज्ञ सम्पन्न हुआ। लाखों लोगों ने यज्ञाहुतियाँ दीं और भोजन प्रसाद ग्रहण किया। यह यज्ञभाव कुछ प्राणवान लोगों के अंत:करण में विकसित होता गया, जिसका जीवंत स्वरूप आज वहाँ दिखाई देता है। गृहे- गृहे यज्ञ अभियान, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, युवा जागृति अभियान, होनहार जरूरतमंदों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था आदि कई ऐसे आन्दोलन हैं जो यहीं से गतिशील हुए और फैलते चले गए। श्री ओमप्रकाश खुराना बंधु व उनके साथियों द्वारा एक प्रेरणादायी कार्य हुआ, वह है- माता भगवती भोजनालय। अश्वमेध यज्ञ के बाद शक्तिपीठ पर अतिथियों के लिए नियमित भोजन व्यवस्था आरंभ हुई। फिर प्रतिदिन 30- 40 गरीबों के लिए भोजन दिया जाने लगा।

20 सितम्बर 1995 से एक नया कार्य आरंभ हुआ। अस्पतालों में रोगियों को तो भोजन दिया जाता है, लेकिन उनकी देखभाल करने को भारी कठिनाई होती है। अत: शक्तिपीठ की ओर से शासकीय अस्पताल (हमीदिया) में 100 लोगों का भोजन नि:शुल्क भोजन पहुँचाने का नियमित क्रम आरंभ किया गया। खुराना बंधु और सेवाभावी सहयोगी झोलों में पैकेट भरकर विभिन्न वॉर्डों में जरूरतमंदों में बाँटने लगे। आगे चलकर पुरानी अखण्ड ज्योति आदि पत्रिकाएँ, पुस्तकें भी बाँटी जाने लगीं। सन् 2017 में हमीदिया अस्पताल का विस्तार कार्य आरंभ हुआ। तब से प्रज्ञापीठ बरखेड़ा में भोजन पकाने और एम्स में ले जाकर बाँटने का क्रम आरंभ हो गया। आज तक वहाँ 200 लोगों का भोजन पकाया और वितरित किया जाता है। दाल, चावल, सब्जी, मसाले आदि अलग- अलग वस्तुओं की आपूर्ति की जिम्मेदारी अलग- अलग लोगों ने सँभाल रखीहै। इन सेवाओं से प्रभावित होकर अब पे्ररणा सेवा ट्रस्ट ने भी जरूरतमंदों को वस्त्र, दवाइयाँ, वैसाखी, दूध, फल, रक्त आदि प्रदान करने का कार्य आरंभ कर दिया है।


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