Published on 2020-02-15
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देवभूमि उत्तराखण्ड में शराब एक अभिशाप है, जिसने समाज, संस्कृति और प्रदेश की समृद्धि को गहरा नुकसान पहुँचाया है। गढ़वाल में एक कहावत है- ‘‘सूर्य अस्त और गढ़वाल मस्त’’। शराब तो है ही घर- घर की बर्बादी का बहुत बड़ा कारण। पुरुष वर्ग इसका बुरी तरह शिकार है और दबी- सहमी महिलाएँ- बच्चे बर्बादी का यह तांडव झेलने को विवश हैं। लेकिन एक साहसी महिला श्रीमती कुसुम जोशी ने सन् 2010 में इसके विरुद्ध मोर्चा खोला और आज वह प्रदेश ही नहीं, देश में एक चर्चित चेहरा बन गई हैं। शराब बंदी की दिशा में असाधारण सफलता के लिए उन्हें दो बार राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों और अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

श्रीमती कुसुम जोशी ने ऋषिकेश के श्यामपुर क्षेत्र से अपना शराब बंदी अभियान चलाना आरंभ किया।
उनके प्रयासों से प्रदेश में विवाहों में होने वाली कॉकटेल पार्टियों पर बहुत अधिक असर हुआ है। हज़ारों विवाह कॉकटेल पार्टियों के बिना करवाने में वे सफल रही हैं। श्रीमती जोशी ने आरंभ में घरघर जाकर आवाज़ उठाई और बहिनों को सहमत किया। हज़ारों बहिनों का सहयोग- समर्थन पाकर उन्होंने ‘मैती’ नामक संस्था बनाई। उनका आन्दोलन आसपास के गाँवों में तेजी से फैलता गया। आज प्रदेश के नौ राज्यों में मैती संस्था सक्रिय है। अन्य प्रदेशों में भी यह आन्दोलन फैल रहा है। इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता के रूप में देवप्रयाग के गाँव डडुआ भंडाली में लगने वाली शराब की फैक्ट्री पर प्रतिबंध लगवाना है। यह हज़ारों बहिनों के सामूहिक प्रयासों से ही सम्पन्न हो सका।


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