Published on 2020-02-20 HARDWAR
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  हरिद्वार 16 फरवरी। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। इस संगोष्ठी में  गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ-उपासना, आदिवासियों लोगों के विकास, वृक्षारोपण, निर्मल गंगा जन अभियान, संगठन को मजबूत करने, नशा मुक्ति आंदोलन आदि योजनाओं को गति देने के लिए संकल्पित कराये गये। तो वहीं शांतिकुंज द्वारा संचालित 11 जोन, 125 उपजोन एवं देश भर के जिला प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों हेतु निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए लाल मशाल की साक्षी में शपथ ली।                 संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि यह समय चुनौतियों से भरा है। इसके बीच प्रलोभनों से बचते हुए पूज्य आचार्यश्री द्वारा निर्धारित रचनात्मक योजनाओं को पूरा करने में जुटना है। आज विश्वभर के लोगों की आशा व अपेक्षाएँ  गायत्री परिवार से जुड़ी है। ऐसे समय में अपनी साधना को पूर्ण करने के साथ निःस्वार्थ भाव से समाज सेवा में लगाने से समाज की आशाएँ पूरी कर सकते हैं। जब हमारे अंदर का संस्कार जागता है, तभी हम आगे बढ़ पाते हैं। गीता के विभिन्न श्लोकों का उल्लेख करते हुए डॉ. पण्ड्या ने वर्तमान समय में एक महत्त्वपूर्ण समय बताया।                 युवा उत्प्रेरक डॉ. पण्ड्या ने कहा कि गायत्री परिवार मप्र, छग, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों के आदिवासियों के विकास के लिए कुटीर उद्योग, प्रशिक्षण सहित विभिन्न रचनात्मक योजना को गति देने में जुटा है। साथ ही युवाओं में वैचारिक क्रांति लाने के लिए भी प्रयासरत हैं। उन्होंने जनवरी 2021 में देश की मायानगरी मुंबई में होने वाले आश्वमेधिक महायज्ञ के लिए तैयारी में जुट जाने का आवाहन किया। केन्द्रीय जोलन समन्वयक श्री कालीचरण शर्मा ने कहा कि समन्वय में बहुत बड़ी शक्ति होती है। इसलिए सभी परिजन एकजुटता के साथ काम करें।                 शांतिकुंज रचनात्मक प्रकोष्ठ के समन्वयक श्री केदार प्रसाद दुबे ने बताया कि संगोष्ठी में वर्ष 2020 में चलाये जाने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई गयी। साथ ही माहवार किये जाने वाले कार्यों की भी विस्तृत चर्चा हुई। इन योजनाओं को मूर्तरूप देने के लिए जोन, उपजोन व जिला प्रतिनिधियों को संकल्पित कराया गया। वर्ष 2020 अलग-अलग क्षेत्रों में छोटे-बड़े चालीस प्रकार के कार्यक्रम चलाये जायेंगे। इनमें वृक्षारोपण, सामूहिक साधना, नशा मुक्ति अभियान, गौ संवर्धन, ग्राम तीर्थ कार्यक्रम, रक्तदान शिविर, नारी जागण, युवा जागरण, गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ, प्रबुद्ध संगोष्ठी, जल संरक्षण अभियान, पॉलीथिन मुक्त भारत संकल्प-जनजागरण सभाएँ आदि प्रमुख हैं। तीन दिन चले इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में कुल बारह सत्र हुए, जिसमें शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया।                 समापन से पूर्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्या, व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र, डॉ. बृजमोहन गौड, डॉ.ओपी शर्मा आदि शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने प्रज्ञा अभियान (पाक्षिक) के ओडिया संस्करण का विमोचन किया। इस अवसर पर  दिल्ली, पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल सहित देशभर के पांच सौ से अधिक चयनित नैष्ठिक कार्यकर्त्ता शामिल रहे। Normal 0 false false false EN-US X-NONE X-NONE /* Style Definitions */ table.MsoNormalTable {mso-style-name:"Table Normal"; mso-tstyle-rowband-size:0; mso-tstyle-colband-size:0; mso-style-noshow:yes; mso-style-priority:99; mso-style-parent:""; mso-padding-alt:0in 5.4pt 0in 5.4pt; mso-para-margin-top:0in; mso-para-margin-right:0in; mso-para-margin-bottom:8.0pt; mso-para-margin-left:0in; line-height:107%; mso-pagination:widow-orphan; font-size:11.0pt; font-family:"Calibri","sans-serif"; mso-ascii-font-family:Calibri; mso-ascii-theme-font:minor-latin; mso-hansi-font-family:Calibri; mso-hansi-theme-font:minor-latin; mso-bidi-font-family:"Times New Roman"; mso-bidi-theme-font:minor-bidi;}


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