Published on 2020-02-24 INDORE
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इन्दौर। मध्य प्रदेश

केन्द्रीय कारागार में 22 बंदियों की सज्Þाा पूरी होने से पूर्व ही रिहाई हुई। कारागार प्रशासन ने इसे गायत्री परिवार के अथक और सतत प्रयासों का परिणाम बताते हुए बंदियों की रिहाई भावभरे समारोह के साथ की। इसमें कारागार के अधिकारी और गायत्री परिवार के सतत प्रयत्नशील परिजन शामिल रहे। जिन 22 बंदियों की सज़ा माफ़ होकर रिहार्ह के आदेश मिले उनमें से 7 आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। अन्य 6 बंदियों को आठ वर्ष की, 3 बंदियों को पाँच वर्ष की और 5 बंदियों को 12 वर्ष की सजा हुई थी।
गायत्री परिवार के परिजनों ने सभी को मंगलाचरण के साथ फूलमाला पहनाकर, गायत्री मंत्र का उपवस्त्र ओढ़ाकर, मिठाई खिलाकर और युग साहित्य भेंट कर विदा करते समय उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। रिहा हो रहे बंदियों को वातावरण के प्रवाह में न बह जाने के लिए नियमित गायत्री उपासना करने, किसी तरह का नशा न करने, क्रोध पर नियंत्रण रखने और अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा दी गई, संकल्प दिलाए गए।

पूरा वातावरण भावविभोर कर देने वाला था। आजीवन कारावास की सजा काट रहे बेटमा निवासी गजेंद्र सोलंकी फूट- फूट कर रो पड़े। कहने लगे, मैंने निश्चय किया था कि जिसने मुझे आपराधिक जीवन जीने को मजबूर किया, उसे जिंदा नहीं छोडूँगा। लेकिन मेरा मानस पूरी तरह बदल गया है। अब अच्छा इंसान बनूँगा और समाज में अच्छाइयाँ फैलाऊँगा। बंदियों के मानस परिवर्तन के लिए गायत्री परिवार के परिजन विनीता खण्डेलवाल, पुष्पादेवी खण्डेलवाल, सुनीता सोलंकी, निर्मला दरवरे, सुषमा सोनी अधिवक्ता, नरेश उपमन्यु कस्टम इंस्पेक्टर, गायत्री परिवार के प्रतिनिधि प्रमोद निहाले, त्रिलोक सोलंकी आदि समय- समय पर कारागार में पहुँचकर प्रयास करते रहे हैं। वहाँ हर पंद्रह दिन में तीन घंटे के कार्यक्रम होते हैं, जिनमें यज्ञ, उद्बोधन, साहित्य वितरण, गायत्री मंत्र लेखन- जप उपासना जैसे कार्य किए जाते हैं। उल्लेखनीय है कि कारागार के अधिकांश बंदी किसी न किसी प्रकार साधना- स्वाध्याय के अभियान से जुड़कर अपने जीवन को उत्कृष्टता की ओर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं और उसका प्रभाव भी अनुभव कर रहे हैं।


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