Published on 2020-02-26

श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी लखनऊ के स्मृति उपवन अनन्ता सभागार में आयोजित 63वें ए.आई.सी. ओ.जी.- 2020 में 2 फरवरी की प्रात:कालीन सभा के मुख्य वक्ता थे। उन्होंने ‘भ्रूण के बेहतर विकास के लिए समग्र दृष्टिकोण’ विषय से सभा को सम्बोधित किया। उन्होंने उपासना, ध्यान, व्यायाम, सकारात्मक सोच, स्वाध्याय जैसे अनेक उपायों के गर्भ में पल रहे भ्रूण पर पड़ने वाले प्रभावों को आर्ष ग्रंथों के मत और वैज्ञानिक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हुए उपस्थित गणमान्य चिकित्सकों और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों को प्रभावित किया।

श्रद्धेय डॉ. साहब ने अपने व्याख्यान का शुभारंभ सम्मेलन की संयोजक डॉ. चंद्रावती, डॉ.प्रीति कुमार सचिव, डॉ. शुक्ला सहसंयोजक, डॉ. एच.पी. गुप्ता एवं डॉ. इंदु टण्डन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया, जिन्होंने विज्ञान के साथ अध्यात्म की महत्ता को समझते हुए इस महत्त्वपूर्ण सम्मेलन में उन्हें आमंत्रित किया था। शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधि ने पावर पॉइण्ट के सहयोग से अपना विषय प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने समग्र स्वास्थ्य की परिभाषा में ‘स्पिरिचुअल वैलफेअर’
को भी जोड़कर अध्यात्म के प्रति सारी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। विज्ञान एवं अध्यात्म एक- दूसरे का सहयोग करते हुए बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। श्रद्धेय ने ‘गर्भोपनिषद्’ की चर्चा करते हुए कहा कि माता- पिता ही यह निर्धारित करते हैं कि उनकी संतान का निर्माण कैसा होगा। वे बच्चे का निर्माण करने वाले जेनेटिक इंजीनियर हैं। इस अवसर पर शान्तिकुञ्ज से ‘आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी’ अभियान को गति दे रहीं डॉ. गायत्री शर्मा, भूतपूर्व निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य, उ.प्र. भी उपस्थित थीं।


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