Published on 2020-02-27 HARDWAR

हरिद्वार 25 फरवरी।

केन्द्रीय हिंदी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं हिंदी विभाग, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान से हिंदी भाषा की प्रयोजनीयता विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं छात्र अध्ययन यात्रा का आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन व कुलगीत से हुआ।

                कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गांधारी पांगती ने कहा कि हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए भारत सरकार द्वारा भाषा पत्रिका, पत्राचार के माध्यम से पढ़ाई, पुरस्कार योजना, शिक्षा पुरस्कार, प्रधानाध्यापक कार्यशाला, राष्ट्रीय संगोष्ठी, पीएचडी छात्रों के लिए अनुदान आदि कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। हिन्दी भाषा की प्रयोजनीयता विषय पर विस्तृत जानकारी दी।

                विवि के कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि भाषा का उद्देश्य आपसी समझ को बढ़ावा देना है। नवजात शिशु भाषा से अपरिचित होते हुए भी अपनी माँ से संबंध स्थापित कर लेता है। कुलपति ने कहा कि यदि हमें हिन्दी की प्रयोजनीयता को समझना है, तो हमें अपनी भूमिका तय करनी होगी। हिन्दी भाषा को माध्यम बनाकर विकास की नई परिभाषा गढ़नी चाहिए। देसंविवि के स्कूल डीन डॉ. सुरेश वर्णवाल ने कहा कि हिन्दी एकमात्र भाषा है जो विश्व को जोड़ने में सक्षम है। हिन्दी मन और बुद्धि के साथ-साथ हृदय को भी जोड़ती है। हिन्दी हमारी आवश्यकता नहीं, अपितु सभी भाषाओं को एक सूत्र में पिरोने वाली श्रेष्ठ भाषा है। अपनी भाषा को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में इतना सशक्त बनाएँ कि संपूर्ण समाज और देश विकास के पथ पर अग्रसर हो। हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जनमाध्यम ही प्रयोजनीयता का आधार है, हिन्दी भाषा के आधार पर हम रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।

                दो दिन चले इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिन्दी को जन-जन की भाषा बनाने एवं इसकी व्यापकता पर गहन मंथन किया गया। कार्यशाला के दौरान केन्द्रीय हिंदी निदेशालय मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के हिन्दी विशेषज्ञद्वय प्रो. सुशील उपाध्याय तथा प्रो. सत्यप्रकाश शर्मा एवं महाराष्ट्र, कर्नाटक और असम से आए हुए शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।


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