Published on 2020-02-28 HARDWAR
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हरिद्वार 21 फरवरी।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि इस धरती में ज्ञान सबसे अधिक पवित्र है। ज्ञान वह है जो आचरण में जिया जाता है। ज्ञान से ही मनुष्य अन्य प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ है।

                वे देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मृज्युंजय सभागार में आयोजित गीतामृत की विशेष सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सद्ज्ञान से अहंकार को गलाया जा सकता है और ज्ञान (विवेक) से अनेक समस्याओं का निराकरण किया जा सकता है। सभ्यता एवं मनुष्य जीवन का बोध ज्ञान की देन है। संस्कारों को विकसित करने का काम ज्ञान से ही होता है। भारतीय संस्कृति में ज्ञान को जीवन का सर्वोत्कृष्ट माना गया है। गीता से संबंधित कई पुस्तकों के लेखक कुलाधिपति ने डॉ. पण्ड्या ने कहा कि ज्ञान से ही मनुष्य की बौद्धिक क्षमता, भावनात्मक स्थिरता एवं आध्यात्मिक विकास होता है। इस अवसर पर देसंविवि के अभिभावक डॉ पण्ड्या ने विद्यार्थियों के विविध शंकाओं का समाधान भी किया।


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