Published on 2020-03-07
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बारीडीह, टाटानगर। झारखण्ड

आर्ष ग्रंथों में निहित अध्यात्म को जनजीवन में प्रतिष्ठित करने में उपनिषदों का विशेष महत्त्व है। परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने इस आर्ष साहित्य के वर्तमान संदर्भ का विशेष टिप्पणियों सहित भाष्य किया है, जिनमें 108 उपनिषद् भी शामिल हैं। युग साहित्य विस्तार केन्द्र बारीडीह, टाटानगर ने इन 108 उपनिषदों को 1008 घरों में सम्माननीय विचारशीलों तक पहुँचाने का अति विशिष्ट संकल्प लिया है। 9 फरवरी को आद. डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी की मुख्य उपस्थिति में एक विशेष आयोजन के साथ उपनिषद् स्थापना के इस अभियान का शुभारम्भ हुआ। उपस्थित 101 भाई एवं 101 बहिनों ने अपने मस्तक पर उपनिषदों को धारण किया और डॉ. चिन्मय जी ने वेद मंत्रोच्चारण के साथ उन पर पुष्पवर्षा करते हुए पूजन किया, अभियान की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं। माननीय प्रतिकुलपति जी ने उपनिषदों को भारतीय आध्यात्मिक चिंतन का मूल आधार बताया, कहा कि यह ऋषियों की ज्ञानचर्चार्ओं का सार है। ये उस निराकार, निर्विकार, असीम को अंतर्दृष्टि से समझने और परिभाषित करने की अदम्य आकांक्षा के लेखबद्ध विवरण हैं। इस अभियान में देसंविवि में सेवाएँ प्रदान कर रहे श्री एम.के. शर्मा, वरिष्ठ कार्यकर्त्ता सर्वश्री प्रभाकर राव, जीतेन्द्र सचान एवं श्री संतोष राय की विशेष भूमिका रही।


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