Published on 2020-03-14

विदिशा। मध्य प्रदेश

श्री कमल सिंह धाकड़ उन दिनों (सन् 2010 में) नटेरन तहसील की ग्राम सेऊ पंचायत के सरपंच थे। उस समय केन्द्रीय योजना के अंतर्गत मॉडल स्कूल स्वीकृत हुआ, लेकिन भवन के लिए शासकीय भूमि उपलब्ध नहीं थी। गाँव का कोई भी व्यक्ति भूमि देने के लिए तैयार नहीं हुआ। तब स्कूल को दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित करने की बात होने लगी। जब कमल सिंह को यह बात पता चली तो उन्होंने अपनी नटेरन गाँव से लगती पाँच बीघा भूमि दान करने की पेशकश की। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह जब नटेरन की यात्रा पर थे तब उन्होंने भूमि का दानपत्र उन्हें सौंप दिया। दो वर्ष में उस भूमि पर स्कूल बनकर तैयार हो गया। आज उस स्कूल में 400 बच्चे पढ़ रहे हैं। इसी तरह जब नटेरन में शासकीय कॉलेज बनाने के लिए भूमि की आवश्यकता पड़ी तो उन्होंने अधिकारियों के आग्रह पर अपनी 12 बीघा भूमि दान कर दी। इस भूमि पर अब कॉलेज बनकर तैयार है। दोनों, कुल 17 बीघा जमीन की कीमत लगभग एक करोड़ बीस लाख रुपये है। 51 वर्षीय श्री कमल सिंह धाकड़ बताते हैं कि उन्हें बचपन में गरीबी के कारण आठवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ देनी पड़ी थी। तब उन्होंने खेती में बहुत मेहनत की। आज पाँच भाइयों के संयुक्त परिवार के पास 300 बीघा जमीन है। विशेषता यह है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई की भूमि दान करते समय उनका हृदय तो गद्गद था ही, सभी भाइयों सहित पिता मूलचंद धाकड़ ने भी इस पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। श्री कमल सिंह मार्केटिंग सोसायटी के निर्माण के लिए एक बीघा और कोर्ट भवन के निर्माण के लिए भी पाँच बीघा भूमि दान कर चुके हैं। समाज कल्याण के लिए उनकी भावना यज्ञमय जीवन का आदर्श है।


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