Published on 2020-06-28
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उपनिषदों में इस सम्बन्ध में अनेकों आदेश भरे पड़े हैं जैसे—
‘‘खाया हुआ अन्न तीन प्रकार का हो जाता है। उसका जो स्थूल भाग है वह मल बनता है, जो मध्यम भाग है वह मांस बनता है और जो सूक्ष्म भाग है वह मन बन जाता है। पीया हुआ जल तीन प्रकार का हो जाता है। उसका जो स्थूल भाग है वह मूत्र बन जाता है, जो मध्यम भाग है वह रक्त हो जाता है जो सूक्ष्म भाग है वह प्राण हो जाता है ......हे सौम्य, मन अन्नमय है। प्राण जलमय है। वाक् तेजोमय है।’’ —छान्दोग्य, अध्याय 6 खण्ड 5


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विशेष ऑनलाइन दीपावली दो दिवसीय उद्बोधन

गायत्री तीर्थ, शान्तिकुंज, हरिद्वार द्वारा विशेष ऑनलाइन दीपावली  दो दिवसीय उद्बोधन   समय: 3 to 4 pm, 9 & 10 Nov.   वक्ता- श्री जितेन्द्र मिश्रा विषय- धनतेरस का महत्व एवं वैज्ञानिकता               .....

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