Published on 2020-06-28
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उपनिषदों में इस सम्बन्ध में अनेकों आदेश भरे पड़े हैं जैसे—
‘‘खाया हुआ अन्न तीन प्रकार का हो जाता है। उसका जो स्थूल भाग है वह मल बनता है, जो मध्यम भाग है वह मांस बनता है और जो सूक्ष्म भाग है वह मन बन जाता है। पीया हुआ जल तीन प्रकार का हो जाता है। उसका जो स्थूल भाग है वह मूत्र बन जाता है, जो मध्यम भाग है वह रक्त हो जाता है जो सूक्ष्म भाग है वह प्राण हो जाता है ......हे सौम्य, मन अन्नमय है। प्राण जलमय है। वाक् तेजोमय है।’’ —छान्दोग्य, अध्याय 6 खण्ड 5


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अभी तो

अभी तो मथने को सारा समुंद्र बाकी है,अभी तो रचने को नया संसार बाकी है,।अभी प्रकृति ने जना कहां नया विश्व है ?अभी तो गढ़ने को नया इंसान बाकी है।।अभी तो विजय को सारा रण बाकी है,अभी तो करने.....

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सभी बढें हैं

सभी बड़े हैं ,सभी चले हैं गुरुवर तेरी राहों में।तरह तरह के फूल खिले हैं ,गुरुवर तेरी छांव ।।तपती हुई रेत थी नीचे, ऊपर जेठी घाम थीदुनिया में तो चहु ओर से मिली तपिश है आग की ,आकर मिली हिमालय.....

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स्वच्छता मनुष्यता का गौरव गन्दगी हटाने में उत्साह रहे.....