Published on 2020-07-05
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जिसके उच्चारण या मनन करने से मनुष्य तर जाता है, उसे मन्त्र कहते है | मन्त्र में शब्दों का गुम्फन ऐसा किया गया है की यदि उसका उच्चारण एक निश्चित आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) और लय (rythm) से किया जाय तो उससे जो अल्फ़ा (alfa) किरणें (waves) निकलती है उससे मस्तिष्क शांत हो जाता है | मन्त्र के बार बार उच्चारण से घर्षण द्वारा विद्युत् चुम्बकीय तरंगे (electromagnetic waves )  उत्पन्न होती है जो हार्मोनल ग्रन्थियो harmonal glands को प्रोत्साहित stimulate कर  शोधन करती है जिससे हमारी भावनाएं, चिंतन और आचरण परिष्कृत होने लगते है | प्रतिरक्षा तंत्र (Psycho neuro immunology system) भी दृढ़ हो जाता है | बौद्धिक शक्तियों एवं स्मृति का विकास तथा चेतना का उध्वरोहन होता है –


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विवेकानंद निबंध प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

◆ राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर बाल संस्कारशाला सिंघिया में हुआ आयोजन◆ शीर्ष तीन प्रतिभागी हुए सम्मानितकौशाम्बी: स्वामी विवेकानंद जी के जयंती के अवसर पर कौशाम्बी जिले के भरवारी नगर में संचालित बाल संस्कारशाला सिंघिया में स्वामी विवेकानंद निबंध.....