Published on 2020-08-31
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Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI /* Style Definitions */ table.MsoNormalTable {mso-style-name:"Table Normal"; mso-tstyle-rowband-size:0; mso-tstyle-colband-size:0; mso-style-noshow:yes; mso-style-priority:99; mso-style-qformat:yes; mso-style-parent:""; mso-padding-alt:0in 5.4pt 0in 5.4pt; mso-para-margin-top:0in; mso-para-margin-right:0in; mso-para-margin-bottom:10.0pt; mso-para-margin-left:0in; line-height:115%; mso-pagination:widow-orphan; font-size:11.0pt; mso-bidi-font-size:10.0pt; font-family:"Calibri","sans-serif"; mso-ascii-font-family:Calibri; mso-ascii-theme-font:minor-latin; mso-hansi-font-family:Calibri; mso-hansi-theme-font:minor-latin; mso-bidi-font-family:Mangal; mso-bidi-theme-font:minor-bidi;} गर्भोत्सव पर ऑनलाइन वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यशाला दिनांक 22 अगस्त 2020 से गायत्री तीर्थ, शांतिकुंज, हरिद्वार द्वारा भावी पीढ़ी के नव निर्माण हेतु आयोजित नौ दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन गायत्री परिवार की प्रमुख श्रेद्धया शैल जीजी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया | इस अवसर पर श्रेद्धया जीजी ने  देश विदेश के लगभग 5000 प्रतिभागियो को सम्बोधित करते हुए कहा कि राम जैसी संतान पाने के लिए राजा दशरथ व् माता कौशल्या की तरह आप को भी बनना पड़ेगा | परम पूज्य गुरुदेव कहते थे कि महान आत्मायें धरती पर जन्म लेने के लिए उतावली है तथा अपने लिए उचित गर्भ के तलाश में रहती है |  उचित आचार-विचार, खान-पान,संकल्प शक्ति, आंतरिक उल्लास,आनंद तथा नैतिक गुणों को अपना कर आप ऐसी सौभग्यशाली माँ बन सकती है तथा परिवार, समाज, देश व राष्ट्र को उचित मार्ग दर्शन दे सके, ऐसी मनचाही संतान को जन्म दे सकती है | डा. गायत्री शर्मा, आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी,शांति कुञ्ज, हरिद्वार द्वारा  गर्भ के ज्ञान-विज्ञान विषय पर पॉवर पॉइंट के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी गयी | डा. शर्मा द्वारा बताया गया कि हमारे देश के ऋषियो द्वारा हजारो वर्ष पूर्व ही बता दिया गया था कि गर्भ के दौरान माता और उसके परिवार के सहयोग से जन्म लेने वाली संतान के गुणों को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है | अभिमन्यु, मदालसा, प्रहलाद , वीर शिवा जी से कौन परिचित नही है जिनमे गर्भ से ही ऐसे गुणों को पैदा करने का श्रेय उनकी माताओ को ही जाता है | मुख्य बात यह है कि आज के वैज्ञानिक युग में, देश विदेश में चल रही शोधो के माध्यम से वैज्ञानिको ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि गर्भ में ही बालक के 80% मष्तिष्क का विकास हो जाता है , गर्भ में रहते हुए ही शिशु सुन सकता है, कई भाषाए सीख सकता है, खुश होता है तथा अपनी नाराजगी भी प्रदर्शित करता है आदि  | इस अवसर पर श्रीमती श्रद्धा साहू, मुम्बई ने बताया कि सामान्यत: लोग तीन तरह ( IQ, EQ & SQ)  के  बौद्धिक विकास के बारे में ही जानते है, पर मनोवैज्ञानिको द्वारा बालको के विकास हेतु नौ तरीके (Nine Intelligence)  के बौद्धिक प्रतिभा की सम्भाव्नाएं है, तथा गर्भ से ही इसे कैसे बढ़ाया जा सकता है, इस विषय पर जानकारी दी | अगले 8 दिवसों तक लगातार चलने वाली इस कार्यशाला में विभिन्न विषयों जैसे गर्भवती माता हेतु आदर्श दिनचर्या, Epigenetic, योग- व्यायाम, ध्यान, प्राणायाम, आहार, गर्भ- संवाद, प्रसव के बाद की समस्याएँ  एवं समाधान, आहार-विहार, गर्भ धारण हेतु तैयारी (pre-planing), प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों का समाधान  आदि विषयों पर  डा. संगीता सारस्वत, श्रीमती मनीषा यादव, डा. रेखा प्रकाश, श्रीमती दर्शना बेन, डा. अमिता सक्सेना, श्रीमती अर्पिता कतरे,डा.अल्पा शाह, डॉ.हेम प्रभा गुप्ता द्वारा प्रकाश डाला जाएगा| अंतिम दिन 30.08.2020 को लगभग 500 गर्भवती माताओं का  गर्भ संस्कार, शांतिकुंज की ब्रह्मवादिनी बहनों सुश्री ऋतू सिंह व श्रीमती चन्द्रिका साहू द्वारा ऑनलाइन संपन्न कराया गया | उक्त कार्यशाला में विभिन्न राज्यों व् केंद्र शासित प्रदेशों जैसे दिल्ली, एन.सी.आर, पंजाब, हिमांचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर आदि से गर्भवती महिलाओं, डाक्टरों, विश्व  गायत्री परिवार के नैष्ठिक कार्यकर्ताओं व्  परिजनों एवं अन्य लोगो द्वारा, जिनमे विशेष रूप से डा. संगीता सारस्वत, डा. रेखा प्रकाश,  डा. अमिता सक्सेना तथा शांति कुञ्ज हरिद्वार की श्रीमती नीलम मोटवानी, ज्योत्स्ना मोदी, भारती नागर एवं श्यामा मित्तल ने भाग लिया | इस शिविर का संयोजन डा. रेखा प्रकाश, गुडगाँव द्वारा,एवं ऑनलाइन सहयोग  ठाणे मुंबई के डा. वरुण मानिक तथा आनंद एवं गुजरात से श्री अजय गुप्ता के द्वारा किया गया  | यह कार्यक्रम  वीडियो कांफ्रेंसिंग के अलावा  फेस बुक तथा यू ट्यूब पर रोज दोपहर 3.00 बजे से 4.30 बजे तक प्रसारित हुआ |


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