Published on 2021-11-06 HARDWAR
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नवरात्र साधना काल अध्यात्म मार्ग के हर पथिक के लिए साधना का स्वर्णिम काल है। दिव्य चैतन्य तीर्थ शान्तिकुञ्ज का सान्निध्य और श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी द्वारा दोनों नवरात्रों में शान्तिकुञ्ज से दिया जाने वाला दैनिक मार्गदर्शन साधक मनोभूमि को कई गुना उर्वरा बना देता है। प्रस्तुत शारदीय नवरात्र में श्रद्धेय डॉ. साहब के व्याख्यान का विषय ‘श्रीमद्भगवद्गीता में व्यक्तित्व का मनोआध्यात्मिक (त्रिगुणात्मक) स्वरूप एवं प्रकार’ था। उन्होंने अपने नौ दिनों के उद्बोधनों में श्रीमद्भग्वद्गीता के विविध श्लोकों, रोचक दृष्टांत एवं संस्मरणों के माध्यम से साधक की सिद्धावस्था-स्थितप्रज्ञता का स्वरूप, उसके लक्षण और उसकी प्राप्ति के सोपानों की सारगर्भित चर्चा की। प्रस्तुत है उनके उद्बोधन के कुछ महत्त्वपूर्ण अंश-


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