Published on 2021-11-09 HARDWAR
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आपकी साधना को हम उसी स्तर पर ले जाना चाहते हैं जिसमें कि प्राचीनकाल के साधक, ऋषि और संत जिस आधार पर अपने आप को परिष्कृत करते थे। आप हमारे यहाँ आयें और खाली हाथ चले जाएँ, ऐसा नहीं हो सकता। एक बात मैं फिर आपसे कहता हूँ कि किसी की भी साधना निष्फल नहीं जाती। शर्त एक ही है कि आपने साधना की हो।
साधना आप किसकी करते हैं? कभी पत्थर की करते हैं, कभी खिलौने की करते हैं। कभी मूर्ति की करते हैं, कभी प्रेत की करते हैं। कभी देवी की तो कभी देवता की करते हैं। असल में आपको जो साधना करनी चाहिए थी, वह आप करते नहीं।
आपके पास अपने भीतर जो देव रहता है, जिसका नाम है-आत्मदेव, जो अन्तर्ज्योति हमारे भीतर जलती है, उस अंतर्ज्योति की साधना करने का आपने प्रयत्न किया होता तो जितना प्रयत्न आपने अब तक उपासना के लिए किया है, मैं आपको यकीन दिला सकता हूँ कि आपकी साधना सफल होती। मैं देवताओं की साक्षी देकर कह सकता हूँ और शपथपूर्वक कह सकता हूँ कि अगर आपने वो कृत्य किया होता, दिशाओं को मोड़ दिया होता, दिशाओं को अपने अन्दर केन्द्रीभूत किया होता तो आपको अध्यात्म के सच्चे लाभ मिलते। (पृष्ठ-7)


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