Published on 2021-11-23 HARDWAR
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कई अनिवार्य प्रसंगों पर युद्ध और शक्ति की भी आवश्यकता हो सकती है। इसलिए उस प्रयोग को सर्वत्र निरस्त तो नहीं किया जा सकता, किन्तु यह भूल नहीं जाना चाहिए कि संगठित प्रतिरोध का अहिंसक साथ भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। उसमें अवांछनीयताओं की जड़ें सुखा देने की क्षमता है, जबकि कुल्हाड़ी के बल पर मात्र टहनियाँ ही कटती हैं और उनकी फिर से अंकुरित होने की पूरी-पूरी संभावना रहती है।
आत्मविश्वास सबसे बड़ा बल है। आशा की प्रचंड शक्ति का सभी को ज्ञान है। एकाकी व्यक्ति अपने को असहाय अनुभव करता है और जैसा कुछ सामने है, उसी को रोते-कलपते सहन करता रहता है। सामूहिक आन्दोलनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसके भागीदारों में से प्रत्येक को अपने साथ समूह-शक्ति के होने का आभास मिलता रहता है और यह विश्वास जमता है कि विशाल जनसमुदाय के संगठित प्रयासों से कुप्रचलनों के विरोध में खड़ी की गई बगावत सफल होकर रहेगी।
निहित स्वार्थ अपनी दुरभिसंधियों को कार्यान्वित करने के लिए मूढ़ मान्यतायें फैलाने से लेकर भय और आतंक की साज-सज्जा बनाने तक के अनेक उपायों का अवलम्बन करते रहते हैं। आकर्षक प्रलोभन देकर बलिष्ठ साथियों की मण्डली खड़ी करते हैं। तस्करी, डकैती के कुचक्र ऐसे ही उपाय अपनाकर सफल होते रहत


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