Published on 2022-08-08
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ऑनलाइन होगासाप्ताहिक शिक्षण
13 से 19 वर्ष की किशोरावस्था में हारमोन्स के परिवर्तन से बच्चों के विचार, भावनायें, स्वभाव, आदत आदि में भी तेजी से बदलाव प्रारंभ होता है। यही समय है जब बच्चों को उनके अच्छे-बुरे का बोध कराकर उनके जीवन को सही दिशा दी जानी चाहिए। यह उत्थान-पतन का वह दोराहा है जहाँ सही मार्गदर्शन मिल जाए तो व्यक्ति महानता की ओर अग्रसर होता है और भटक जाए तो बुरी संगत में आकर पतन की ओर बढ़ता चला जाता है। हमें इस उम्र में किशोरों का मार्गदर्शन अवश्य करना चाहिए। छत्तीसगढ़ में ‘प्रांतीय ऑनलाइन किशोर संस्कार शाला’ का शुभारंभ करते यह विचार केन्द्रीय जोनल समन्वयक डॉ. ओ.पी. शर्मा जी ने व्यक्त किये। छत्तीसगढ़ जोन समन्वयक श्री शुकदेव निर्मलकर ने बताया कि किशोरसंस्कार शाला का संचालन साप्ताहिक होगा।डॉ. कुन्ती साहू मुख्य प्रशिक्षिका कीजिम्मेदारी निभा रही हैं। उन्होंने बाल संस्कारशाला से निकले बच्चों को किशोर संस्कारशाला के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया।


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