Published on 2022-11-18
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राष्ट्रवादी चिंतन और उदात्त व्यक्तित्व सम्पन्न युवा समाज को समर्पित
देव संस्कृति विश्वविद्यालय का छठवाँ दीक्षान्त समारोह दिनांक 1 नवम्बर 2022 को लोकसभा अध्यक्ष माननीय श्री ओम बिरला जी के मुख्य आतिथ्य और कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर माननीय लोकसभा अध्यक्ष की धर्मपत्नी डॉक्टर अमिता बिरला भी मंचासीन थीं। इस समारोह में वर्ष 2017 से 2022 तक विभिन्न पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने वाले 2659 छात्र-छात्राओं को उपाधियाँ प्रदान की गइर्ं। सह नौ यश:। सह नौ ब्रह्मवर्चसम्।कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान एवं देवपूजन, अतिथि स्वागत के साथ हुआ। कुलपति श्री शरद पारधी जी ने अपने स्वागत उद्बोधन में देव संस्कृति विश्वविद्यालय की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालयकी स्थापना दैवीय योजना के अन्तर्गत हुई है। ऋषियों, तपस्वियों और संतों की साक्षी में इसकी प्राण प्रतिष्ठा की गई। उन्होंने कहा कि यहाँ आचार्य और विद्यार्थियों में ‘सह नौ यश:। सह नौ ब्रह्मवर्चसम्।’ का भाव पैदा किया जाना एक ऐसी उपलब्धि है, जिससे अभीष्ट लक्ष्य की ओर विद्यार्थियों की तीव्र गति से प्रगति होती है। अपने महान उद्देश्य के कारण हम विद्यार्थियों के भीतर एक उमंग और जोश पैदा करने में हम सफल रहे हैं।डॉ. चिन्मय पण्ड्या, प्रतिकुलपति जी ने दीक्षांत समारोह की बताने से पूर्व माननीय श्री ओम बिरला जी और डॉ. अमिता बिरला को कर्मनिष्ठा एवं ईश भक्ति का अप्रतिम साधक बताकर जीवन विद्या के आलोक केन्द्र देव संस्कृति विश्वविद्यालय में स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने उपाधि ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों के भावी उत्तरदायित्वों की विस्तार से चर्चा की। माननीय लोकसभा अध्यक्ष ने अपने अनुभव साझा करते हुए उपस्थित युवाओं को देव संस्कृति विश्वविद्यालय में विद्यार्जन के सौभाग्य एवं उनके राष्ट्र-धर्म का बोध कराया। स्तुत्य है सेवा-समर्पण का भावमाननीय कुलाधिपति जी ने कहा कि हमने जो पढ़ाया वह गुरूदेव का साहित्य ही पढ़ाया है। हमें यह देखकर प्रसन्नता होती है कि यहाँ के विद्यार्थी कैरियर की अच्छी-अच्छी संभावनाओं को छोड़कर समाज और संस्कृति की सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं। बहुत से विद्यार्थी यहीं रूककर ब्राह्मणोचित जीवन में अध्ययन-अध्यापन की परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रेरक उद्बोधन के पश्चात् मंचासीन अतिथियों ने विवि. एवं विभागीय स्तर पर स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 144 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किये। 70 विद्यार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई। दर्शकों की करतल ध्वनि से पूरा मृत्युंजय सभागार गूँजता रहा। इस अवसर पर स्वर्ण पदक विजेता एवं सभी विद्यार्थियों के चेहरों पर अपार उत्साह झलकता रहा। मंचासीन गणमान्यों के साथ कुलसचिव श्री बलदाऊ देवांगन, आमंत्रित महानुभाव, जन-प्रतिनिधि, उपस्थित माननीय विद्या परिषद, सदस्य, प्रबन्ध मण्डल सदस्य, व्यवस्थापक मण्डल सदस्य, प्रेस मीडिया, शासन-प्रशासन के अधिकारी, समस्त आचार्य, आचार्या, सहयोगी स्टाफ सदस्य, विद्यार्थीगण एवं उनके अभिभावक आदि उपस्थित थे। सायंकालीन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों के उल्लास को अनेक गुना बढ़ा दिया। 


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