Published on 2022-11-19
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वियतनाम के सुप्रसिद्ध 13 योग संस्थानों के प्रमुखों देव संस्कृति विश्वविद्यालय आए। उनके लाभार्थ ‘योग एवं आयुर्वेद’ विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विश्वहित को ध्यान में रखते हुए योग और आयुर्वेद के व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक पक्षों पर जानकारियाँ साझा की गइर्ं। विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में जैसे-जैसे लोगों में समग्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, वैसे-वैसे प्राचीन निरापद चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों की आस्था भी बढ़ रही है। हमें इन आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करना होगा।  देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने 19 अक्टूबर को कार्यशाला के समापन सत्र को सम्बोधित किया। उन्होंने परम पूज्य गुरूदेव के दृष्टिकोण की चर्चा करते हुए लोगों के वैचारिक एवं भावनात्मक परिष्कार की ओर ध्यान आकर्षित किया। इस दृष्टि से उन्होंने शान्तिकुञ्ज एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के सकारात्मक एवं आध्यात्मिक वातावरण की चर्चा भी की।आदरणीय डॉ. चिन्मय जी ने अतिथियों को धन्यवाद देते हुए पुन: पधारने का आमंत्रण दिया। कार्यशाला की उपलब्धियों से सभी अतिथिगण अभिभूत थे।


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