Published on 2022-11-19
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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी-22 अक्टूबर 2022 के दिन देव संस्कृति विश्वविद्यालय स्थित फार्मेसी एवं शान्तिकुञ्ज के मुख्य सभागार में आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वन्तरि की जयंती आयुर्वेद के विकास में जुट जाने के आह्वान के साथ मनाई गई। फार्मेसी में हवन के साथ भगवान धन्वन्तरि की विशेष पूजा-अर्चना की गयी। इस अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भगवान धनवंतरि की आराधना के साथ निरोगी काया की कामना और प्रार्थना से जुड़ा है। उन्होंने प्रकृति के अनुसार आहार-विहार बनाये रखने के लिए प्रेरित किया।अपने संदेश में श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने कहा कि देवताओं के चिकित्सक, दीर्घतपा के पुत्र व केतुमान के पिता धन्वन्तरि भगवान विष्णु के तेरहवें अवतार हैं। धन्वन्तरि जयन्ती अंत: और बाह्य प्रकृति को समझने और उनमें संतुलन, सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देने वाला पर्व है। परमात्मा ने मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ जीवन दिया है, उसका उपयोग सदैव स्वस्थ रखकर उत्कृष्ट उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर गतिशील रहते हुए ही किया जाना चाहिए। डॉ. ओ.पी. शर्मा, डॉ. गायत्री शर्मा, डॉ. मंजू चोपदार, डॉ. शिवानंद साहू, डॉ. अलका मिश्रा, डॉ. वन्दना श्रीवास्तव आदि ने उपस्थित जनमानस को स्वास्थ्य रक्षा के लिए आदर्श जीवनचर्या और आयुर्वेदिक उपायों की जानकारी दी। 


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