Published on 2023-01-23
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रजत जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित 151 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं को गायत्री महामंत्र की दीक्षा दिलाई 
भिलाई, दुर्ग। छत्तीसगढ़यज्ञ जीवन का श्रेष्ठतम कर्म है। यज्ञमय जीवन में रूचि रखने वाले आस्थावान मनुष्यों को चाहिए कि वे जीवन लक्ष्य की पूर्णता की दिशा में निरंतर अग्रसर रहें। मात्र मनुष्य से ही यह अपेक्षा की जाती है कि वह पशुता की ओर न बढ़े, हीन प्रवृत्तियों से बचे तथा जीवन में देवत्व का सतत अभिवर्धन करता रहे।इन्हीं शुभकामनाओं के साथ 27 से 30 दिसम्बर 2022 की तिथियों में सेक्टर-7 भिलाई के दशहरा मैदान में आयोजित 151 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ अपार उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यह महायज्ञ अश्वमेध यज्ञ भिलाई के रजत जयंती समारोह के रूप में आयोजित किया गया था। यज्ञ की पूर्णाहुति में लगभग 20 हजार गायत्री साधक एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। यज्ञ संचालन शान्तिकुञ्ज से आई श्री श्यामबिहारी दुबे जी की टोली ने किया। महायज्ञ के अंतिम दिन करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र श्रद्धेया शैल जीजी, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉक्टर चिन्मय पण्ड्या जी, आदरणीया शेफाली पण्ड्या जी का देवमंच पर उपस्थिति होना अपने आप में युगदेवता की प्रसन्नता और महायज्ञ की सफलता का सूचक था। उनकी सत्प्रेरणा और शुभाशीषों ने पूरे छत्तीसगढ़ के प्राणवान कार्यकर्त्ताओं की श्रद्धा-भावना का भरपूर पोषण किया। सभा में उपस्थित लगभग 10,000 साधक श्रद्धालुओं ने श्रद्धेया शैल जीजी के श्रीमुख से गायत्री महामंत्र की दीक्षा ली। 
आत्मज्योति जगाता दीपयज्ञआदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने दीपयज्ञ में उपस्थित 5000 श्रद्धालुओं के विशाल जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने गुरू और भगवान की कृपा पाने के लिए छोटी-मोटी भेंट-पूजा और गुणगान की अपेक्षा जीवन देवता की साधना-आराधना करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ईश्वर तो न्यायनिष्ठ और विवेकवान है। व्यक्ति के व्यक्तित्व में प्रभु के प्रति जो गरिमा व श्रद्धा उभरती है, उसी के आधार पर वे प्रसन्न होते हैं और अपने शिष्यों को अनुदान देते हैं।
शानदार सफलता के शिल्पीआयोजन में शांतिकुंज से जोन समन्वयक शुकदेव निर्मलकर, रामावतार पाटीदार, पुष्कर, विवेक एवं मीडिया टीम, शान्तिकुञ्ज से आई श्री श्याम बिहारी दुबे जी की टोली के साथ छत्तीसगढ़ जोन समन्वयक श्रीमती आदर्श वर्मा, सांसद विजय बघेल, डॉ. दयाराम साहू, रामशिला साहू, एस.पी. सिंह, धीरज लाल टाँक, वी.पी. सिंह, डॉ. पी.एल. साव, योगेन्द्र साहू, वाय के साहू, अनिता साहू , लोकनाथ साहू, मोहन उमरे, अलख राम नायक सहित अंचल के गायत्री परिवार के सभी कार्यकर्त्ताओं का सहयोग रहा


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