Published on 2023-03-03
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आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी नगरी के महायज्ञ में आने से पूर्व प्रज्ञापीठ गोहरापदर के दर्शन करते हुए रानीगाँव, सिरसिदा, सिहावा, धमतरी के विभिन्न प्रज्ञा संस्थानों में पहुँचे। वहाँ उपस्थित कार्यकर्त्ताओं को युग निर्माण आन्दोलन में शबरी जैसी ऐतिहासिक, अविस्मरणीय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। रानीगाँव पहुँचे डॉ. चिन्मय जी का स्थानीय परिजनों ने पलक पाँवड़े बिछाकर स्वागत किया।रानीगाँव ऋंगी ऋषि की तप:स्थली है। यह शान्तिकुञ्ज के जीवनदानी कार्यकर्त्ता श्री घनश्याम देवांगन की और सिरसिदा श्री पुनीत गुरुवंश तथा श्रीमती फूलेश्वरी किरण की मातृभूमि है। श्री घनश्याम देवांगन इन दिनों जन्मभूमि आँवलखेड़ा की व्यवस्था सँभाल रहे हैं, जबकि शान्तिकुञ्ज में विद्युत विभाग प्रभारी श्री पुनीत गुरुवंश ने युग साहित्य का छत्तीसगढ़ी भाषा में अनुवाद करने का बहुत बड़ा पुरुषार्थ किया है। नगरी के 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में आदरणीय डॉ. चिन्मय जी एवं मंचासीन गणमान्यों ने उनकी लिखी 32 पुस्तकों का विमोचन किया। 


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