Published on 2023-03-03
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प्रत्येक मनुष्य में विद्यमान हैं दिव्य संभावनाए
महासमुंद। छत्तीसगढ़प्रत्येक व्यक्ति परमात्मा का एक दिव्य संदेश लेकर जन्म लेता है। आवश्यकता है उस दिव्य संदेश को अनुभव करने और अपने देवत्व को जगाने की। बुद्ध का संदेश ‘अप्प दीपो भव’ और बालक नारायण के समर्थ रामदास बनने जैसे अनेक मार्मिक दृष्टांतों के साथ उन्होंने कहा कि मनुष्य चाहे तो अपने भीतर विद्यमान उत्कृष्ट संभावनाओं को साकार कर स्वामी विवेकानन्द, समर्थ रामदास की तरह महापुरुष बन सकता है और चाहे तो जीवन भर छोटी-छोटी समस्याओं में ही घिरे रहकर सुर दुर्लभ जीवन को बर्बाद कर सकता है। आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने महासमुंद में आयोजित विशाल 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में दीपयज्ञ के अवसर पर उपस्थिति श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उपरोक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि छोटीछोटी समस्याएँ हमारे पैरों की बेड़ियाँ बन जाती हैं और मन के उत्साह को समाप्त कर देती हैं, हमें इस दयनीय स्थिति से निकलना होगा। यह108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ महासमुंद के पिटियाझर स्थित कृषि उपज मंडी में सम्पन्न हुआ। तीन जिलों से आए अपार श्रद्धालुओं ने इस यज्ञ में भाग लिया। प्रतिदिन दोपहर दो बजे तक यज्ञ की पारियाँ चलती रहीं। कार्यक्रम को शान्तिकुञ्ज से पहुँची श्री जितेन्द्र मिश्रा की टोली ने सम्पन्न कराया। शान्तिकुञ्ज से छत्तीसगढ़ जोन समन्वयक श्री शुकदेव निर्मलकर, रामावतार पाटीदार, पंकज चंदेल, पुष्कर राज सहित प्रांतीय जोन समन्वयक श्रीमती आदर्श वर्मा, श्रीमती सरला कोसरिया उपस्थित रहे। सर्वश्री ललित कुमार मेश्राम, प्रभात उपाध्याय, मनहरण साहू, बोधराम साहू, रिखी राम, श्याम जी, नायक जी, भरत जी, मुकेश जी, कैलाश जी, ,गुप्ता जी, नेतराम साहू, कन्हैया पटेल, आर पी साहू आदि ने कार्यक्रम आयोजन में विशेष योगदान दिया ।
सौभाग्य : एकमात्र महासमुंद वह पावन भूमि है जिसे सन् 70 के दशक में परम पूज्य गुरुदेव ने दो बार सहस्र कुण्डीय यज्ञ आयोजन का सौभाग्य प्रदान किया था। संकल्प : महासमुंद के कार्यकर्त्ताओं ने यज्ञ की पूणार्हुति के अवसर पर पूरे जिले में गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ-उपासना अभियान को पहुचाने का संकल्प लिया।संस्कार : दीक्षा, नामकरण, अन्नप्राशन, मुंडन संस्कार और तीन जोडे आदर्श विवाह संपन्न हुए। आकर्षण : यज्ञ स्थल पर सैण्ड आर्टिस्ट द्वारा निर्मित भगवान महाकाल की भव्य मूर्ति सबको आकर्षित करती रही। दीपयज्ञ की छटा निराली थी। मुख्य मंच के अलावा आकर्षक झाँकियों व गुरुसत्ता के प्रतीक ‘प्रखर प्रज्ञासजल श्रद्धा’ दीप मालाओं से सजाया गया था।गणमान्यों की भागीदारी : इस महायज्ञ में पूर्व सांसद चंदूलाल साहू, संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर आदि अनेक गणमान्यों ने भाग लिया।सक्ती और बरपेलहाडीह में स्नेह सिंचनबैसपाली (रायगढ़) से महासमुन्द की यात्रा में आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी गायत्री शक्ति पीठ सक्ती पहुँचे। वहाँ कार्यकर्त्ताओं से नवनिर्मित जिले में मिशन के विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की। शान्तिकुञ्ज के जीवनदानी कार्यकर्त्ता श्री पुस्कर राज के छोटे से गाँव बरपेलहाडीह पहुँचकर पुष्कर जी के परिवारी जनों और लगभग 200 ग्राम वासियों से भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। महासमुंद पहुँचने से पूर्व लम्बी यात्रा कर बेमचा प्रज्ञापीठ पहुँचे, दर्शन और आरती की। महासमुंद से रायपुर लौटते हुए परम पूज्य गुरुदेव के निकटस्थ रहे स्व. ज्वाला प्रसाद शर्मा जी के घर जाकर उनके परिजनों से सौजन्य भेंट की। वहां परम पूज्य गुरुदेव के साधनाकाल के दुर्लभ चित्र के दर्शन किए। 


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