Published on 2023-03-03
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कायाकल्प के लिए बनी एक अकादमीमित्रो! शान्तिकुञ्ज धर्मशाला नहीं है। यह कॉलेज है, विश्वविद्यालय है। कायाकल्प के लिए बनी एक अकादमी है। हमारे सतयुगी सपनों का महल है। आपमें से जिन्हें आदमी बनना हो, इस विद्यालय की संजीवनी विद्या सीखने के लिए आमंत्रण है। हमने बुलाया केवल उन्हीं को है, जो समर्थ हों, शरीर या मन से बूढ़े न हो गए हों, जिनमें क्षमता हो, जो पढ़े-लिखे हों। इस तरह के लोग आयेंगे तो ठीक है, अगर आप अपनी नानी को, दादी को, मौसी को, पड़ोसन को लेकर के यहाँ कबाडखाना इकट्ठा कर देंगे तो यह विश्वविद्यालय नहीं रहेगा? फिर तो यह धर्मशाला हो जाएगी, साक्षात् नरक हो जाएगा। इसे नरक मत बनाइए आप। आप सबमें जो विचारशील हों, भावनाशील हों, हमारे इस कार्यक्रम का लाभ उठाएँ। अपने को धन्य बनाएँ और हमको भी। (वाङ्द्दमय-क्र-68, पेज-1.41)आवास व्यवस्था के संदर्भ मेंशान्तिकुञ्ज एक जाग्रत् तीर्थ है, आत्मचेतना के जागरण और वैचारिक परिष्कार का अद्वितीय केन्द्र है। यह कोई धर्मशाला या पर्यटन स्थल नहीं है। यहाँ शिक्षण, संस्कार, आवास, भोजन जैसी सभी व्यवस्थाएँ नि:शुल्क हैं, लेकिन आवासीय व्यवस्था केवल विशिष्ट उद्देश्यों के लिए आने वालों के लिए हैं। • साधना एवं प्रशिक्षणयहाँ नौ दिवसीय संजीवनी साधना सत्र (प्रत्येक माह की 1 से 9, 11 से 19 तथा 21 से 29 की तिथियों में), एक मासीय लोकसेवी प्रशिक्षण सत्र (प्रत्येक माह की 1 से 29 की तिथियों में) तथा समय-समय पर कई अन्य सत्र चलते हैं। इनमें पूर्व स्वीकृति प्राप्त परिजन ही भाग ले सकते हैं। इन सबकी जानकारी आॅनलाइन ली जा सकती है, शिविरों में भागीदारी के लिए आवेदन की सुविधा आॅनलाइन उपलब्ध है। सम्पर्क कीजिए : ६६६.ं६ॅस्र.ङ्म१ॅ२ँ्र५्र१ फोन : 9258360655• संस्कार : शान्तिकुञ्ज में यज्ञोपवीत, मुण्डन, विवाह, पुंसवन अन्नप्राशन, नामकरण, विद्यारंभ, दीक्षा, श्राद्ध-तर्पण, जन्मदिन, विवाह दिन आदि संस्कार नि:शुल्क कराए जाते हैं। संस्कार कराने आने वाले परिजनों को एक दिन ठहरने की व्यवस्था की जाती है। • तीर्थ सेवन : पूर्व सूचना देकर एवं अनुमति प्राप्त कर तीर्थ सेवन के लिए शान्तिकुञ्ज में कभी भी आया जा सकता है। इसके लिए अधिकतम तीन दिन ठहरने की सुविधा है। ध्यानाकर्षण : शान्तिकुञ्ज में आवासीय व्यवस्था साधकोचित है। अधिकांश लोगों को सामूहिक रूप से ठहरना होता है। पूर्व में कमरा आरक्षण जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। अपने आवास की स्वच्छता का स्वयं ध्यान रखना होता है। संस्कार या तीर्थ सेवन के लिए आने वाले परिजनों को जो सुविधा एवं आवासीय व्यवस्था उपलब्ध होती है, वही आवंटित की जाती है। अखिल विश्व गायत्री परिवार हर दिन मत्यावतार की तरह विस्तार ले रहा है। शान्तिकुञ्ज के प्रति करोड़ों लोगों की आस्था है। ऐसे में यहाँ आने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक होती है। सबके लिए मनचाही व्यवस्थाएँ कर पाना किसी भी प्रकार संभव नहीं है। बहुत-से लोग बिना किसी सूचना के विशिष्ट गणमान्यों को शान्तिकुञ्ज भेज देते हैं या साथ लेकर आते हैं। ऐसी स्थिति में मनचाही व्यवस्था न होने पर स्वयं तो निराश होते ही हैं, शान्तिकुञ्ज और मिशन की गरिमा को भी चोट पहुँचाते हैं। ऐसे परिजनों से निवेदन है कि अपने आने की पूर्व सूचना देकर और उपलब्ध व्यवस्था की जानकारी लेकर ही घर से चलें या किसी को शान्तिकुञ्ज भेजें।


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