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सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीने में ही जीवन का आनंद है।


तर्क की सार्थकता तब है, जब वह श्रद्धा के साथ जुड़ा हो।

सच्ची लगन तथा निर्मल उद्देश्य से किया हुआ प्रयत्न कभी निष्फल नहीं जाता।

खरे बनिये, खरा काम कीजिए और खरी बात कहिए, इससे आपका हृदय हल्का रहेगा। 

कठिनाइयों की परीक्षा से गुजर कर ही साधना फलित होती है। 

व्यक्ति की उन्नति एवं समाज की शांति उसकी सज्जनता एवं मर्यादा पालन पर निर्भर है। 


सहानुभूति मनुष्य के हृदय की वह कोमलता है, जिसका निर्माण संवेदना, दया, प्रेेम तथा करुणा के सम्मिश्रण से होता है।

हम जिसे सही समझते हैं, निर्भय होकर अपनायें और गलत समझते हैं, उसके आगे किसी भी कीमत पर न झुकें 

पाप से मन को बचाये रहना और पुण्य कार्यों में प्रवृत्त रखना ही मानव जीवन का सबसे बड़ा पुरुषार्थ है।


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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

जहाँ व्यक्ति का मिथ्या अहंकार समाप्त हो जाता है, वहाँ उसकी गरिमा आरंभ होती है। फूलों की सुगन्ध हवा के प्रतिकूल नहीं फैलती, पर सद्गुणों की कीर्ति दसों दिशाओं में फैलती है। अध्यात्म एक नकद धर्म है, जिसे मात्र आत्मशोधन की तपश्चर्या.....

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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

भगवान आदर्शो श्रेष्ठताओं के समुच्चय का नाम है। सिद्धान्तों के प्रति मनुष्य के जो त्याग और बलिदान हैं, वस्तुतः वही भगवान की भक्ति है। जाग्रत आत्माएँ कभी अवसर नही चूकतीं हैं। वे जिस उद्देश्य को लेकर अवतरित होती हैं, उसे पूरा किये.....

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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

आलस्य से बढ़कर अधिक समीपवर्तीं शत्रु दूसरा नहीं।घमण्डी के लिए कहीं कोई ईश्वर नहीं, ईर्ष्यालु का कोई पड़ोसी नहीं और क्रोधी का कोई मित्र नहीं।मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, वह उनका निर्माता, नियंत्रणकर्ता और स्वामी है। परमेश्वर का प्यार केवल सदाचारी.....