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ईश्वरीय प्यार को प्राप्त करने के लिए अपने आंतरिक स्तर को परिष्कृत करना ही सर्वश्रेष्ठ तप- साधना है।


शिक्षा एक ऐसा साँचा हैे, जिसमें छात्र की गीली मिट्टी को किसी भी आकृति में ढाला जा सकता है। 

अध्यात्म की पहली शिक्षा है- मनुष्य निरन्तर मंगलमय कामनाएँ करे और सदाचारी बने।

बहुमूल्य समय का सदुपयोग करने की कला जिसे आ गई ,उसने सफलता का रहस्य समझ लिया।

परमात्मा जिसके जीवन में कोई विशेष अभ्युदय- अनुग्रह करना चाहता है, उसकी बहुत- सी सुविधाओं का समाप्त कर दिया करता है।

पेट और मस्तिष्क स्वास्थ्य की गाड़ी को ठीक प्रकार चलाने वाले दो पहिये हैं, इनमें एक बिगड़ गया तो दूसरा भी बेकार ही बचा रहेगा। 

ज्ञान अक्षय है, उसकी प्राप्ति शैय्या तक बन पड़े तो भी उस अक्सर का हाथ से नहीं देना चाहिए। 

साहस उन्हीं का सराहनीय है जो दूसरों की प्रतीक्षा न करके स्वयं आगे आते हैं। 

मन सरसों की पोटली जैसा है। एक बार बिखर गई तो समेटना असंभव हो जाता है। 


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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

जहाँ व्यक्ति का मिथ्या अहंकार समाप्त हो जाता है, वहाँ उसकी गरिमा आरंभ होती है। फूलों की सुगन्ध हवा के प्रतिकूल नहीं फैलती, पर सद्गुणों की कीर्ति दसों दिशाओं में फैलती है। अध्यात्म एक नकद धर्म है, जिसे मात्र आत्मशोधन की तपश्चर्या.....

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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

भगवान आदर्शो श्रेष्ठताओं के समुच्चय का नाम है। सिद्धान्तों के प्रति मनुष्य के जो त्याग और बलिदान हैं, वस्तुतः वही भगवान की भक्ति है। जाग्रत आत्माएँ कभी अवसर नही चूकतीं हैं। वे जिस उद्देश्य को लेकर अवतरित होती हैं, उसे पूरा किये.....

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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

आलस्य से बढ़कर अधिक समीपवर्तीं शत्रु दूसरा नहीं।घमण्डी के लिए कहीं कोई ईश्वर नहीं, ईर्ष्यालु का कोई पड़ोसी नहीं और क्रोधी का कोई मित्र नहीं।मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, वह उनका निर्माता, नियंत्रणकर्ता और स्वामी है। परमेश्वर का प्यार केवल सदाचारी.....