img

जीवन में बाधाओं और असफलताओं को पार करते हुए लक्ष्य की ओर साहसपूर्वक बढ़ते जाने में ही मनुष्य की महानता है। 


जो मन का गुलाम है, वह ईश्वर का भक्त नही हो सकता। जो ईश्वर भक्त है, उसे मन की गुलामी न स्वीकार हो सकती है, न सहन। 

प्रगति के लिए संघर्ष करो, अनीति को रोकने के लिए संघर्ष करो, इसलिए भी संघर्ष करो कि संघर्ष के कारणों का अन्त हो सके। - पं० श्रीराम शर्मा आचार्य 

अध्ययन, विचार, मनन, विश्वास एवं आचरण द्वारा जब एक मार्ग को मजबूती से पकड़ लिया जाता है, तो अभीष्ट उद्देश्य का प्राप्त करना बहुत सरल हो जाता है। 

लोकसेवियों को याद रखना कि सामाजिक कार्यकर्ता की वाणी ही नहीं, उसका पूरा व्यक्तित्व ही बोलता है और वाणी की अपेक्षा उसका व्यक्तित्व सुना जाता है। 

सद्व्यवहार है। जो सोचता है कि मैं दूसरों के काम आ सकने के लिए कुछ करूँ, वही आत्मोन्नति का सच्चा पथिक है। 

आदर्शों के प्रति और कर्तव्य के प्रति लगन का जहाँ भी उदय हो रहा है, समझना चाहिए कि वहाँ किसी महामानव का आविर्भाव हो रहा है। 

साहस उन्हीं का सराहनीय है,जो दूसरों की प्रतीक्षा न करके स्वयं आगे आते हैं व अवतारों का सहयोगी बन नवसृजन का पुण्य कमाते हैं। 


युगनिर्माण होना है, पर उसका वाचालों के नहीं, तपस्वियों के कंधों पर रहेगा। युग की आवश्यकता आज ऐसे ही तपस्वियों की प्रतीक्षा कर रही है।

प्रत्येक ईश्वर भक्त में अपने इष्टदेव की अनुरूपता उभरनी चाहिए। इसी कसौटी पर हर किसी की भक्ति भावना में कितनी यथार्थता है, इसकी जाँच परख की जा सकती है।  


Write Your Comments Here:


img

सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

जहाँ व्यक्ति का मिथ्या अहंकार समाप्त हो जाता है, वहाँ उसकी गरिमा आरंभ होती है। फूलों की सुगन्ध हवा के प्रतिकूल नहीं फैलती, पर सद्गुणों की कीर्ति दसों दिशाओं में फैलती है। अध्यात्म एक नकद धर्म है, जिसे मात्र आत्मशोधन की तपश्चर्या.....

img

सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

भगवान आदर्शो श्रेष्ठताओं के समुच्चय का नाम है। सिद्धान्तों के प्रति मनुष्य के जो त्याग और बलिदान हैं, वस्तुतः वही भगवान की भक्ति है। जाग्रत आत्माएँ कभी अवसर नही चूकतीं हैं। वे जिस उद्देश्य को लेकर अवतरित होती हैं, उसे पूरा किये.....

img

सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

आलस्य से बढ़कर अधिक समीपवर्तीं शत्रु दूसरा नहीं।घमण्डी के लिए कहीं कोई ईश्वर नहीं, ईर्ष्यालु का कोई पड़ोसी नहीं और क्रोधी का कोई मित्र नहीं।मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, वह उनका निर्माता, नियंत्रणकर्ता और स्वामी है। परमेश्वर का प्यार केवल सदाचारी.....