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जीवन एक पाठशाला है जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं। 


परोपकार से बढ़कर और निरापद दूसरा कोई धर्म नहीं। 

मनुष्य उपाधियों से नहीं, श्रेष्ठ कार्याें से सज्जन बनता है। 

प्रत्येक से प्यार करो, थोड़े में संतोष रखो और किसी को दुःख मत दो।

समय की कद्र करो, एक मिनट भी फिजूल मत गँवाओ। 

सच्ची लगन तथा निर्मल उद्देश्य से किया हुआ प्रयत्न कभी निष्फल नहीं जाता। 

कमल पुष्प सामान्य तालाब में उगने पर भी अपनी पहचान अलग बनाते और देखने वाले के मन पर अपनी प्रफुल्लता की प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं। 

यदि मनुष्य कुछ सीखना चाहे तो उसकी प्रत्येक भूल कुछ न कुछ सिखा देती है। 

भूत लौटने वाला नहीं, भविष्य का कोई निश्चय नहीं, संभालते और बनाने योग्य तो वर्तमान है।

धर्म का मार्ग फूलों की सेज नहीं, इसमें बड़े- बड़े कष्ट सहन करने पड़ते हैं।

हर भक्त, हर स्थिति में मुस्कुराते रहिये, निर्भय रहिये, कर्तव्य करते रहिये और प्रसन्न रहिये।


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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

जहाँ व्यक्ति का मिथ्या अहंकार समाप्त हो जाता है, वहाँ उसकी गरिमा आरंभ होती है। फूलों की सुगन्ध हवा के प्रतिकूल नहीं फैलती, पर सद्गुणों की कीर्ति दसों दिशाओं में फैलती है। अध्यात्म एक नकद धर्म है, जिसे मात्र आत्मशोधन की तपश्चर्या.....

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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

भगवान आदर्शो श्रेष्ठताओं के समुच्चय का नाम है। सिद्धान्तों के प्रति मनुष्य के जो त्याग और बलिदान हैं, वस्तुतः वही भगवान की भक्ति है। जाग्रत आत्माएँ कभी अवसर नही चूकतीं हैं। वे जिस उद्देश्य को लेकर अवतरित होती हैं, उसे पूरा किये.....

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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

आलस्य से बढ़कर अधिक समीपवर्तीं शत्रु दूसरा नहीं।घमण्डी के लिए कहीं कोई ईश्वर नहीं, ईर्ष्यालु का कोई पड़ोसी नहीं और क्रोधी का कोई मित्र नहीं।मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, वह उनका निर्माता, नियंत्रणकर्ता और स्वामी है। परमेश्वर का प्यार केवल सदाचारी.....