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आय से अधिक खर्च करने वाले तिरस्कार सहते और कष्ट भोगते हैं ।


किसी का सुधार उपहास से नहीं, उसे नये सिरे से सोचने और अदलने  का अवसर देने से होता है ।

जो जैसा सोचता और करता है,वह वैसा ही बन जाता है ।

कुकर्मी से बढ़कर अभागा कोई नहीं, क्योंकि विपत्ति में उसका कोई साथी नहीं रहता ।

उन्हे मत सराहो, जिनने अनीतिपूर्वक सफलता पाई और सम्पति कमाई ।

प्यार और सहकार से भरा पूरा परिवार ही धरती का स्वर्ग होता है ।

प्रसन्न रहनें के दो ही उपाय है-आवश्यकताएँ कम करें और परिस्थितियों से तालमेल बिठायें ।

काम की अधिकता से नहीं ,आदमी उसे भार समझकर अनियमित रूप से करने पर थकता है ।

जो अपनी सहायता आप करने को तत्पर है,ईश्वर केवल उन्हीं की सहायता करता है ।


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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

जहाँ व्यक्ति का मिथ्या अहंकार समाप्त हो जाता है, वहाँ उसकी गरिमा आरंभ होती है। फूलों की सुगन्ध हवा के प्रतिकूल नहीं फैलती, पर सद्गुणों की कीर्ति दसों दिशाओं में फैलती है। अध्यात्म एक नकद धर्म है, जिसे मात्र आत्मशोधन की तपश्चर्या.....

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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

भगवान आदर्शो श्रेष्ठताओं के समुच्चय का नाम है। सिद्धान्तों के प्रति मनुष्य के जो त्याग और बलिदान हैं, वस्तुतः वही भगवान की भक्ति है। जाग्रत आत्माएँ कभी अवसर नही चूकतीं हैं। वे जिस उद्देश्य को लेकर अवतरित होती हैं, उसे पूरा किये.....

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सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

आलस्य से बढ़कर अधिक समीपवर्तीं शत्रु दूसरा नहीं।घमण्डी के लिए कहीं कोई ईश्वर नहीं, ईर्ष्यालु का कोई पड़ोसी नहीं और क्रोधी का कोई मित्र नहीं।मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, वह उनका निर्माता, नियंत्रणकर्ता और स्वामी है। परमेश्वर का प्यार केवल सदाचारी.....