img

व्यक्तित्व की गरिमा प्रतिभा, पद या वैभव नहीं व्यक्ति की आंतरिक महानता पर निर्भर है। 



बुद्धिमान वह है, जो किसी की गलतियों से हुई हानि देखकर अपनी गलतियाँ सुधार लेता है। 


ज्ञानयोगी की तरह सोचें, कर्मयोगी की तरह पुरुषार्थ करें और भक्तियोगी की तरह सहृदयता उभारें। 


व्यक्तिवाद की उपेक्षा और समूहवाद के प्रति रुझान रखने वाले व्यक्तियों का समाज ही समुन्नत होता है।

पुरुषार्थ में परिस्थितियों को बदल डालने की पूरी- पूरी सामर्थ्य विद्यमान है। 


मनुष्य का प्रयत्न एवं परिश्रम ही उसके भाग्य एवं भविष्य का निर्माण करता है। 


सर्वव्यापी ईश्वर की दृष्टि में हमारा गुप्त- प्रकट कोई आचरण अथवा भाव छिप नहीं सकता। 


शील एवं शिष्टता दैवी गुण हैं, इनका अवतरण कर लेने से मनुष्य सहज ही मानसिक विकास की ओर बढ़ने लगता है। 


शिष्टाचार वह अमृत है, जिससे कटुता, विरोध और शत्रुता पिघल जाती है।




Write Your Comments Here:


img

सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

जहाँ व्यक्ति का मिथ्या अहंकार समाप्त हो जाता है, वहाँ उसकी गरिमा आरंभ होती है। फूलों की सुगन्ध हवा के प्रतिकूल नहीं फैलती, पर सद्गुणों की कीर्ति दसों दिशाओं में फैलती है। अध्यात्म एक नकद धर्म है, जिसे मात्र आत्मशोधन की तपश्चर्या.....

img

सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

भगवान आदर्शो श्रेष्ठताओं के समुच्चय का नाम है। सिद्धान्तों के प्रति मनुष्य के जो त्याग और बलिदान हैं, वस्तुतः वही भगवान की भक्ति है। जाग्रत आत्माएँ कभी अवसर नही चूकतीं हैं। वे जिस उद्देश्य को लेकर अवतरित होती हैं, उसे पूरा किये.....

img

सद्विचार (पं० श्री राम शर्मा आचार्य)

आलस्य से बढ़कर अधिक समीपवर्तीं शत्रु दूसरा नहीं।घमण्डी के लिए कहीं कोई ईश्वर नहीं, ईर्ष्यालु का कोई पड़ोसी नहीं और क्रोधी का कोई मित्र नहीं।मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, वह उनका निर्माता, नियंत्रणकर्ता और स्वामी है। परमेश्वर का प्यार केवल सदाचारी.....