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गायत्री शक्तिपीठ की सतत सक्रियता से राठ क्षेत्र में दहेज, दान, दिखावा और फिजूल खर्ची के बिना आदर्श विवाहों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। विविध जातियों के लोग अब सामूहिक विवाह समारोहों का आयोजन करते हुए ऐसे आदर्श विवाहों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। विगत दिनों ऐसे समारोहों की धूम रही, जिनका संचालन गायत्री शक्तिपीठ राठ की टोली ने किया। श्यामला देवी पर 48 सर्व जातीय सामूहिक विवाह हुए। 26 मई को लोधी समाज के 250 जोड़ों का विवाह संस्कार गायत्री परिवार के पुरोहितों ने कराया। विश्वकर्मा एवं पाल समाज के 30-30 जोड़ों के आदर्श विवाह समारोहों का संचालन युग पुरोहितों ने ही किया। इनके अलावा सैनी, सविता, कुशवाहा, स्वर्णकार आदि जातियों के आदर्श विवाह समारोह गायत्री परिवार की संस्कार पद्धति से ही हुए। शक्तिपीठ पर सर्व जातीय 128 जोड़ों का आदर्श विवाह संस्कार कराया गया। ये संस्कार वैसे तो क्षेत्र के सभी कार्यकत्र्ताओं की सद्ïभावना और नैष्ठिïक प्रयासों से हो रहे हैं, लेकिन श्री सुखदयाल राठौर का इसमें विशेष योगदान है। इनके माध्यम से मिशन के विचार और संस्कार भी खूब फैल रहे हैं। लोगों में प्रगतिशील और आदर्श जीवन जीने की ललक बढ़ती ही जा रही है।


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