Published on 2015-06-05

समस्त विश्व में 5 जून पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है और अखिल विश्व गायत्री परिवार जो एक आध्यात्मिक - सामाजिक संस्था है, अपने हरिद्वार स्थित मुख्यालय के साथ, देश एवं विदेश में स्थित करोड़ों परिजनों के द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अनेक महत्वपूर्ण अभियान चला रही है। जल संरक्षण एवं शुद्धि के लिये भागीरथी जलाभिषेक अभियान है तो धरती के आंचल, पेड़ों को लगाने हेतु वृक्ष गंगा अभियान चलाया जा रहा है। 

गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने कहा कि हमारा वृक्ष गंगा अभियान एक अनूठा अभियान है। यह सिर्फ पेड़ लगाने का अभियान मात्र नहीं है वरन् पर्यावरण के हितैषी वृक्ष लगाना एवं उनका पूरा संरक्षण इस अभियान की विशेषता है। इसके अंतर्गत शोभा के पौधे नहीं लगाये जाते हैं वरन् औषधीय महत्व के, घने- छायादार, फलदार पेड़ लगाये जाते हैं। इस संस्था के संस्थापक एवं पितृ पुरुष पं.श्रीराम शर्मा आचार्य की जन्म शताब्दी वर्ष 2011 में संस्था ने देश भर में एक करोड़ वृक्ष लगाने का संकल्प लिया था जिस लक्ष्य को प्राप्त कर लिया गया है जिसमें से 99 प्रतिशत वृक्ष जीवित हैं। अभियान में विशेष उपलब्धि के रूप में मध्य प्रदेश का नाम लिया जा सकता  है जहां पर खण्डवा, बुरहानपुर, सेंधवा, इन्दौर, भोपाल, सीधी आदि स्थानों पर विशेष प्रयास किये गये हैं। सप्त आंदोलन विभाग शान्तिकुन्ज के प्रभारी श्री केदार प्रसाद दुबे  के अनुसार, इस दिशा में एक नया प्रयोग आरंभ किया गया जिसके अंतर्गत गांवों के आसपास वीरान पड़ी छोटी- छोटी पहाडिय़ों को गोद लेकर उनको हरा किया जाता है। इस के अंतर्गत अब 100 से अधिक पहाडिय़ों को हरा किया गया है। 
  
उन्होंने आगे बताया कि कोलकाता के गायत्री परिवार यूथ ग्रुप ने भी पेड़ लगाने का अनोखा अभियान आरंभ किया है जिसमें उनके द्वारा अनवरत 238 रविवार तक 21657  वृक्ष लगाये गये हैं जो एक कीर्तीमान है। इस प्रयास को पूरे महानगर में तीव्र समर्थन मिल रहा है। इसके अतिरिक्त गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश एवं अन्य कई राज्यों में इस प्रकार के नूतन प्रयास इस अभियान में चल रहे हैं। 

इस अनूठी योजना में वृक्ष लगाने वाले को तरु पुत्र या तरु मित्र के रूप में पेड से भावनात्मक रूप से जोड़ा जाता है जिससे उसकी देखभाल का उत्तरदायित्व उसपर आ जाता  है। इस तरह से यह संस्था धरती के हरे भरे आंचल को संवारने की दिशा में विशेष प्रयास कर रही है जिससे धरती का एवं मनुष्य का कल्याण होना निश्चित है।





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