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पवित्र नगरी ताप्ती तट पर हुआ नारी जागृति का शंखनाद, सम्मेलन में क्षेत्रों से हजारों महिलाओं ने लिया भाग

[दिनेश साहू], Dec 18, 2017
मुलताई। मां ताप्ती की पवित्र नगरी मुलताई में गायत्री परिवार महिला मण्डल द्वारा अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में तहसील स्तरीय विशाल नारी जागृति सम्मेलन का आयोजन गायत्री शक्तिपीठ मुलताई में सम्पन्न हुआ जिसमें प्रबुद्ध बहनों द्वारा उपस्थित महिलाओं को सम्बोधित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मण्डल की बहनों द्वारा मातृवंदना गीत से हुआ। तत्पश्चात देवमंच पर देवप्रतिमाओं के समक्ष मुख्य अतिथि रूक्मणी उपाध्याय, कार्यक्रम अध्यक्षता श्रीमती रेखा शिवहरे, विशिष्ठ अतिथि गौरी बालापूरे बैतूल, डां0 शैला मुले बैतूल द्वारा दीपप्रज्जवलन एवं देवपूजन कर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर मंच संचालन करते हुवे महिला मण्डल की श्रीमती निर्मला चैधरी ने कार्यक्रम का स्वरूप् एवं नारी जागृति सम्मेलन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुवे बताया कि शान्तिकुंज हरिद्वार द्वारा पूरे देश में ब्रह्मवादिनी बहनों की टोलियों द्वारा नारी जागृति का अखल जागया जा रहा है पूज्य गुरूदेव ने नारीयों को पुरूषों की बराबरी का दर्जा दिया है एवं प्रत्येक क्षे़़त्र में नारीया अपना एक विश्ष्ठि स्थान रखती है। इसी उद्देश्य से नारीयों के अपने अधिकार एवं कत्तर्वय के प्रति जाग्रत होने एवं निडर, निर्भय होकर समाजिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए आगे आना चाहिए। सर्वप्रथम  21 वी सदी नारी सदी विषय पर बैतूल से पधारी गौरी बालापुरे ने अपने औजस्वी उद्बांेधन में नारीयों को समाज के प्रति अपने दायित्व का बोध कराया और कहा कि आज की नारी दुर्गा के रूप कार्य करे एवं अपने आप को निडर एवं साहसी रूप में समाज के सामने पेश करे जिससे समाज के हर वर्ग में नारीयो को सम्मान एवं उच्च पद प्राप्त हो। जिससे हम अपने परिवार समाज का नाम रोशन कर सकें। शास.महाविद्यालय प्राचार्य वर्षा खुराना ने नारियों को शिक्षा के अधिकार विषय पर अपने सारंग्रभित उद्बोधन में कहा कि आज हम शिक्षा कों किताबी ज्ञान के तौर पर जोड लेतें है जबकि शिक्षा हमें ज्ञानअर्जन से ही प्राप्त होती है उन्होने कहा कि शिक्षित व्यक्ति वह होता है जिसकी चेतना जाग्रत होती है इसी के बल पर हमें सुख समृद्धि और सम्मान प्राप्त होता है। नारीयों को गायत्री का अधिकार विषय पर शान्तिकुंज प्रतिनिधि रूकमणी उपाध्याय बहन ने कहा कि पूज्य गुरूदेव ने अपने मनुष्य को गायत्री का अधिकार दिया है गायत्री अर्थात सद्बुद्धि । गायत्री प्रत्येक मनुष्य के लिए पारस पत्थर है जिसने भी इसे छु लिया वह सोना बन गया। आज सद्बुद्धि की प्रत्येक मनुष्य को आवश्यकता है। इसलिए गायत्री महामंत्र को प्रत्येक नर-नारीयों को जप करने का अधिकार है। बैतूल से पधारी डां. शैला मुले बहन ने प्रथम सुख निरोगी काया विषय पर कहा कि हमें निरोग जीवन जीने के लिए पूज्य गुरूदेव द्वारा बताए उनके सिद्धांतों पर चलना चाहिए। साथ ही हमारे शरीर को स्वस्थ्य बनाये रखने के उद्देश्य से हमें योग -प्राणायाम के साथ-साथ प्राकृतिक परिवेश में रहकर निरोगी की काया बनायी जा सकती है। अन्त में में श्रीमती रेखा शिवहरे ने गायत्री परिवार के इस विशाल आयोजन के लिए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में महिलाओं का एक विशाल समुदाय आध्यात्मिकता से जुडकर समाज की प्रत्येक गतिविधियों में बढचढ कर भाग ले सकती है। उन्होने गायत्री परिवार के इस आयोजन के प्रति प्रसन्नता व्यक्त की। तत्पश्चात देवसंस्कृति विश्वविद्यालय से आई देव कन्याओं ने अपने उदबोधन में कहा कि गायत्री परिवार समुद्र की तरह विशाल परिवार है जिसमें प्रत्येक नर-नारीयां आ कर इस देव परिवार में भागीदारी कर पूज्य गुरूदेव के सपनों को साकार कर सकते है।  पूज्य गुरूदेव ने प्रत्येक मनुष्य को देवत्व की उपाधि प्रदान की है नर से नारायण बननें के लिए हमें आध्यात्किता की शरण में जाना है एवं व्यक्तित्व में देवत्व के गुण धारण करना है । अन्त में आभार प्रदर्शन में मीना मानकर ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त कर नये साल की बधाई दी एवं सभी उपस्थित बहनों का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि इस गरिमामयी आयोजन बहनों की इस विशाल उपस्थित से ही सम्भव हुआ है । कार्यक्रम में महिला मण्डल की बहने एवं नगर की बहने एवं ग्रामीण क्षेत्रों हजारो बहने ने भाग लिया । अन्त में सभी बहनों को हल्दी कुमकुम लगा कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।






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