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नारी उत्कर्ष के लिए बहिनों ने थाम ली है लाल मशाल


  • सामान्य जीवन तो सभी जीते हैं। जीवन तो उनका सार्थक है जो एक मिशन की तरह जीवन जीते हुए दूसरों की पीड़ा हरने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं। 
डभोई, वडोदरा (गुजरात)
गायत्री परिवार डभोई द्वारा २१ से २५ मई की तारीखों में पाँच दिवसीय आवासीय कन्या कौशल शिविर आयोजित हुआ। पूरे गुजरात से आयी १०२० कन्याओं ने इसमें भाग लिया। शिविर संचालन डभोई की कथावाचक बहिन रश्मिकाबेन पटेल ने किया। शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री केपी दुबे, गुजरात जोन प्रभारी श्री राजूभाई दवे, गुजरात युवा प्रकोष्ठ प्रभारी श्री महेन्द्रभाई पटेल तथा गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों से आये कई वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं ने इस शिविर में उपस्थित रहकर शिविरार्थी बहिनों में समाज और संस्कृति के लिए श्रेष्ठ कार्य करते हुए परम पूज्य गुरुदेव-परम वंदनीया माताजी के संपल्पों को पूरा करने के संकल्प जगाये। 

श्री केपी दुबे ने शिविर के उद्घाटन सत्र में कहा कि नारी केवल सौन्दर्य और दिखावे की वस्तु नहीं, वह देवी है। उसे अपने भीतर के देवत्व-मानवीय जीवन को गौरवान्वित करने वाली अंतःकरण की उत्कृष्टता को पहचानना और विकसित करने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। सामान्य जीवन तो सभी जीते हैं। जीवन तो उनका सार्थक है जो एक मिशन की तरह जीवन जीते हुए दूसरों की पीड़ा हरने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं। 

श्री महेन्द्रभाई पटेल ने गुरुदेव की बात दोहराई। गुरुदेव कहते थे कि गंगावतरण कठिन नहीं है, कठिन तो भगीरथ का पैदा होना है। बहिनें गुरुदेव-माताजी की तरह तप-साधना के मार्ग पर चल पड़ें तो इस राष्ट्र को फिर से महापुरुषों के, महान विभूतियों के दर्शन होने लगेंगे।  

पाँच दिन में ध्यान, योग, कर्मकाण्ड, डफली, गीत-संगीत, संस्कार आदि का शिक्षण दिया गया। प.पू. गुरुदेव के प्रगतिशील विचारों के सान्निध्य में उत्कृष्ट जीवन जीने का व्यावहारिक शिक्षण दिया गया। जनजागृति के लिए बाल संस्कार शाला, स्वाध्याय केन्द्र, जन्म दिवस, दीपयज्ञ, झोला पुस्तकालय, समूह साधना जैसे अभियान चलाने का शिक्षण दिया गया। 

विदाई सत्र में बहिनों ने इन आन्दोलनों को चलाने के उत्साहवर्धक संकल्प लेते हुए शिविर की सफलता का परिचय दिया। पाँच दिनों में पूरे गुजरात से आयी कन्याओं का एक नया परिवार बनता नजर आया। विदाई की वेला में इस आत्मीयता से वशीभूत बहिनों की पलकें सहज भाव से भीनी हो गयीं। 


नारी जागरण प्रशिक्षण शृंखला

   कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
जोनल केन्द्र कुरुक्षेत्र ने हरियाणा में चार स्थानों पर नारी जागरण प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कर जनजागरण एवं जनसंपर्क करने वाली बहिनों की कई टोलियों का निर्माण किया। इनके माध्यम से आगामी दिनों युग चेतना विस्तार की शानदार संभावनाएँ बनी हैं। 

गुड़गाँव प्रशिक्षण केन्द्र में लगभग १०० बहिनों ने प्रशिक्षण लिया, जिनमें से २४ ने नित्य दो घंटे समयदान का संकल्प लिया। इनकी चार-पाँच टोलियाँ बनाकर विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न कराने संबंधी मार्गदर्शन दिया गया। सोनीपत उपजोन के शिविर में प्रशिक्षित बहिनों में से दो टोलियाँ बनीं। हिसार उपजोन की ३० बहिनों ने प्रशिक्षण लिया। अंतिम कुरुक्षेत्र में कैथल, करनाल, अंबाला, यमुनानगर की ७० बहिनों ने प्रशिक्षण लेकर मिशन की बेहतर प्रस्तुति की कला सीखी। 

यह प्रशिक्षण शृंखला १० से २९ मई के बीच सम्पन्न हुई। शांतिकुंज की ब्रह्मवादिनी बहिन श्रीमती श्यामा राठौर, श्रीमती मीनाक्षी शास्त्री और श्रीमती मीना गढ़िया ने नारी जागरण प्रशिक्षण शिविरों का संचालन किया। 

वडोदरा (गुजरात)
कारेलीबाग के बी.जी. पटेल फॉर्म में १९ से २३ अप्रैल तक प्रतिदिन सायंकाल प्रज्ञा पुराण कथा का आयोजन हुआ। कथा व्यास सुश्री मीनाक्षीबेन काबरीया ने नारी जागरण और देव मानव निर्माण के प्रसंगों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। 

व्यक्ति के चिंतन-चरित्र को नयी दिशा देने वाले ऋषि चिंतन ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया। विविध वर्ग के विशिष्ट आमंत्रित अतिथियों ने इन विचारों को परिवार और समाज में स्वर्ग की सृष्टि करने में समर्थ बताया। योग और  सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। 

 खरगोन (मध्य प्रदेश)
परिवारों में स्नेह, सद्भाव, श्रेष्ठ संस्कार, उत्तम विचार बढ़ाकर उन्हें युग निर्माणी आदर्शों की ओर ले जाने के लिए १९ मई को गायत्री शक्तिपीठ खरगोन पर दम्पति शिविर का आयोजन किया गया। सद्गृहस्थ साधिका श्रीमती प्रभा मुकेश भारद्वाज, श्री गोपाल कृष्ण अमझरे, श्री कृष्णराव शर्मा, युवा प्रवासी श्री सौरभ मोर, श्री संतोष पाटीदार ने परम पूज्य गुरुदेव द्वारा बताये गृहस्थ जीवन के अनमोल सूत्रों की व्याख्या की। प्रयोग बहुत ही उत्साहवर्धक रहा। इसमें भाग लेने वाले दम्पतियों ने हर माह ऐसे शिविर रखने की माँग आयोजकों से की। 








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