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सुदृढ़ हो रहा है आदर्श ग्राम विकास का राष्टट्रीय तंत्र श्रीराम आरण्यक, इमलिया (भोपाल) में आयोजित हुई राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए पूरे देश के १५० अग्रदूत

आदर्श गाँवों के विकास की हमारी दिशाधारा क्या हो? इसका जीवंत स्वरूप इमलिया, भोपाल में २ से ४ अप्रैल की तारीखों में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रस्तुत किया गया। देश में सक्रिय १० ग्राम संकुलों के प्रतिनिधि तथा स्वतंत्र रूप से अपने गाँवों को आदर्श ग्राम बनाने के लिए प्रयत्नशील कुल १५० प्रमुख परिजनों को इसमें आमंत्रित किया गया था। यह राष्ट्रीय कार्यशाला देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं शांतिकुंज में आन्दोलन प्रकोष्ठ प्रभारी श्री के.पी. दुबे, श्री मनीष चौरिया की मुख्य उपस्थिति में आयोजित हुई थी। 

कार्यशाला में शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ ग्रामतीर्थ योजना पर कार्य कर रहे विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। इस क्रम में शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री कामता प्रसाद साहू, श्री के.पी. दुबे, श्री मनीष चौरिया, हुकुम पाटीदार, जितेन्द्र चौहान ने स्वावलम्बन, जैविक कृषि, ग्राम स्वच्छता, जल संरक्षण, व्यसनमुक्ति, पर्यावरण संवर्धन, वनौषधि चिकित्सा जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। योगेन्द्र गिरि ने ग्राम विकास हेतु सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। 

शांतिकुंज के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने कार्यशाला का उद्घाटन युगऋषि परम पूज्य गुरुदेव की युग निर्माण योजना पर प्रकाश डालते हुए किया। वे तीनों दिन कार्यकत्र्ताओं के बीच रहे, अलग-अलग समूहों में परिजनों से चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया और उनकी कठिनाइयों के समाधान भी सुझाये। 

ग्राम संकुलों का निर्माण, प्रयोजन और प्रशिक्षण शृंखला
प.पू. गुरुदेव के जन्म शताब्दी समारोह में १००८ गाँवों को आदर्श गाँव के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया था। पिछले ४-५ वर्षों से इस दिशा में सुनियोजित ढंग से प्रयास किये जा रहे हैं। पूरे देश में परिजनों ने लगभग ५०० गाँवों को आदर्श विकास के लिए चुन लिया है और इसके लिए प्रयास भी जारी हैं। 

आदर्श ग्राम विकास की गायत्री परिवार की अवधारणा उन्हें स्वच्छ, स्वस्थ, शिक्षित, स्वावलम्बी, व्यसनमुक्त, संस्कारयुक्त, जल और हरीतिमा सम्पन्न तथा प्रगतिशील सोच वाले गाँववासियों के विकास की रही है। गाँव की निर्भरता और उत्पादों की अधिकाधिक खपत अपने क्षेत्र में जितनी अधिक होगी, उतनी ही मँहगाई, बेरोजगारी, गरीबी, मिलावटखोरी, भ्रष्टाचार जैसी जटिल समस्याओं से मुक्ति मिल सकेगी। सामूहिक प्रयासों से ही बेहतर तकनीक अपनायी जा सकेगी। 

अकेले गाँवों की बजाय ग्राम संकुलों में इस योजना को क्रियान्वित करना अधिक सरल और सफल हो सकता है। इनके माध्यम से अपने उत्पादों के लिए अच्छे बाजार मिलेंगे और कुटीर उत्पाद सफल हो सकेंगे। इसीलिए अब ग्राम संकुलों को विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। ऐसे १० ग्राम संकुल बनाये जा चुके हैं और १० और प्रस्तावित हैं। इन ग्राम संकुलों के केन्द्र को श्रीराम आरण्यक नाम दिया गया है। 

राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय प्रशिक्षणों की योजना
श्रीराम आरण्यकों के निर्माण से ग्राम विकास के लिए कार्य कर रहे परिजनों को प्रायोगिक प्रशिक्षण का लाभ भी मिलने लगा है। श्रीराम आरण्यक, इमलिया में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला भी इसी कड़ी में आयोजित हुई। 

अब हर छ: माह में ग्रामतीर्थ योजना पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। अगली राष्ट्रीय कार्यशाला २२ एवं २३ अक्टूबर को २८ एकड़ भूमि पर बुरहानपुर में बने श्रीराम आरण्यक में रखी गयी है। 






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shelandra rawat
2016-07-25 12:44:02
good yojna
shelandra rawat
2016-07-25 12:43:20
very good
Leeladhar Prasad Sahu
2016-05-05 15:44:50
Ghar-Ghar Deep Jalana hi