पुष्कर मेले के समानांतर हुआ अभूतपूर्व, अद्वितीय प्रयोग

Published on 2017-12-18

अत्यंत प्रभावशाली रही पुष्कर अरण्य प्रदक्षिणा 84कोस की वाहन रथयात्रा, 24 कोसीय पदयात्रा और 108 गाँवों की प्रव्रज्या हुई पौराणिक मान्यता है कि पुष्कर तीर्थ अंतरिक्ष में रहता है और कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा के दिनों में पुष्कर में उतरता है। इन दिनों पुष्कर में विशाल मेला लगता है, जिसमें देश- विदेश के श्रद्धालु आकर पुण्य लाभ लेते हैं। गायत्री परिवार के प्रांतीय संगठन ने अपने सावित्री साधना अनुष्ठानों के क्रम में इन दिनों तीर्थ चेतना जागरण का अनूठा, अभूतपूर्व प्रयोग किया। साधना के लिए पूरे राजस्थान से आये साधकों को तीन वर्गों में बाँटकर 1 . चौबीस कोसीय पदयात्रा, 2. चौरासी कोसीय रथ एवं वाहन यात्रा निकाली तथा3 . अरण्य क्षेत्र के चयनित 108 गाँवों की ग्राम प्रव्रज्या की। यह विशिष्ट साधना एवं जनजागरण प्रयोग शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री के.पी. दुबे एवं श्री नरेन्द्र ठाकुर तथा प्रांतीय प्रभारी श्री अंबिका प्रसाद श्रीवास्तव, श्री घनश्याम पालीवाल की उपस्थिति और मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। 12 नवंबर को पुष्कर ब्रह्म सरोवर तीर्थ का पूजन- अभिषेक कर शक्ति कलश के लिए जल लिया गया। इसके साथ ही पुष्कर के प्रमुख मंदिरों, कुण्डों, तपःस्थलियों का जल- रज एकत्रित किया गया। सायंकाल संपर्क, मीडिया, यज्ञ- दीपयज्ञ, स्वच्छता, सुरक्षा, ज्ञानरथ, माईक आदि व्यवस्थाओं को सँभालने वाली 24 टोलियों का प्रशिक्षण हुआ, सभी को प्रचार सामग्री उपलब्ध करायी गयी। अगले दिन शक्तिपीठ कन्या महाविद्यालय प्रांगण में आयोजित शुभारंभ समारोह में साधनायुक्त तीर्थ जागरण अभियान में भाग लेने के लिए 200 साधक उपस्थित थे। सेनाचार्य 1008 श्री अचलानंद जी महाराज समारोह के मुख्य अतिथि थे। इस अवसर पर देवशक्तियों का आह्वान, पूजन, शक्तिकलश में जल- रज पूरण का कार्य सम्पन्न हुआ। युग साधकों ने सर्वप्रथम शक्ति कलश रथ के साथ पुष्कर मेले के में हर वर्ष निकलने वाली शोभायात्रा में भाग लिया। इसमें सभी आश्रमों के महंत, संत, समाज सेवी संस्थाएँ, प्रशासन भाग लेते हैं; मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों की झाँकियाँ निकलती हैं। गायत्री परिवार की झाँकी में ब्रह्माजी के साथ विभिन्न देवता और ऋषिगण विराजमान होकर जनहित में आरंभ की अपने योजनाओं को गति देने का आह्वान करते दिखाई दिये। वाहन यात्रा, पदयात्रा और ग्राम प्रव्रज्या के लिए गठित टोलियों का जनजागरण अभियान यहीं से आरंभ हो गया। जगह- जगह शक्ति कलश के स्वागत में भारी जन उत्साह देखा गया। गाँव के गाँव स्वागत के लिए आये। स्वच्छता, संगोष्ठियों का आयोजन हुआ। गायत्री परिवार ने साधना के जीवन को प्रखर और पवित्र बनाने, सामूहिक प्रयासों से वातावरण शोधन और समाज के नवनिर्माण की प्रेरणा दी। हर रात्रि अलग- अलग स्थानों पर विश्राम हुआ। तीन प्रकार की टोलियाँ सायंकाल एक ही स्थान पर एकत्र होतीं, साधना, यज्ञ, समीक्षा, भावी कार्ययोजना का क्रम सामूहिक ही होता। पाँच दिवसीय अभियान का समापन 17 नवंबर को शांतिकुंज प्रतिनिधियों के साथ प्रांतीय प्रमुख कार्यकर्त्ताओं- सर्वश्री एपी श्रीवास्तव, घनश्याम पालीवाल, सीताराम पारीक, फतहकंवर सनाढ्य, गोपाल स्वामी, रविसिंह इंदौलिया, वीरशंकर शर्मा, भंवरलाल जोशी, श्यामसिंह और भक्तिपीठाधीश्वर सेनाचार्य 1008 श्री अचलानंद जी सहित सैकड़ों कार्यकर्त्ताओं की उपस्थित में बड़े जोश और उल्लास के साथ हुआ। गायत्री परिवार की श्रद्धा- निष्ठा से गद्गद सेनाचार्य जी ने इस अवसर पर भाव विह्वल स्वर में कहा कि मैंने शिव- शक्ति को तो नहीं देखा, लेकिन पं.श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी को साक्षात शिव- पार्वती के रूप में देखा है।

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04 से 12 जून तक 108 गांवों में ग्राम तीर्थ यात्रा निकाली गई, चिल्हाटी – बिलासपुर (छ.ग.)

चिल्हाटी  : देव संस्कृति विद्यालय चिल्हाटी जिला बिलासपुर (छ.ग.) को केन्द्र मान कर आस पास के 108 गांव में गायत्री मिशन के कार्यों का विस्तार एवं प्रचार प्रसार के तहत प्रथम चरण में 75 गांव तक सप्त सूत्रीय आन्दोलन की.....


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