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आत्म परिष्कार और उज्ज्वल भविष्य के लिए करें समूह साधना के विविध प्रयोग अखिल विश्व गायत्री परिवार वर्ष 2014 को समूह साधना वर्ष के रूप में मनायेगा। आज गायत्रीतीर्थ-शांतिकुंज में इस आशय की घोषणा करते हुए संस्था प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि आज सारी दुनिया में अराजकता और आतंक का साम्राज्य दिखाई भले ही देता हो, लेकिन मानवमात्र का उज्ज्वल भविष्य तथा भारत का अभ्युदय सुनिश्चित है। यह किसी व्यक्ति का नहीं, उस दिव्य चेतना का निर्धारण है, जिसका संचालन और नियंत्रण गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी सहित हिमालय वासी ऋषिसत्ता कर रही है। समाज की दिशा और दशा को बदलने के लिए जन-जन के मन में उठती उमंग और बढ़ते साहसी कदम उज्ज्वल भविष्य के अवतरण का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं। वर्ष 2013 की विदाई के दिन शांतिकुंज में आयोजित विशेष सभा को संबोधित करते हुए डॉ. पंड्या ने कहा कि समाज को आदर्शों की राह पर चलने वाले साहसी युग सृजेताओं की आवश्यकता है। लोगों में उत्साह है, योजनाएँ भी बनती हैं, लेकिन ये तब तक सफल नहीं हो सकतीं जब तक कि व्यक्ति में आदर्शों के अवलम्बन का साहस न जागे। इन दिनों दिव्य चेतना जन-जन को झकझोर रही है। वह लोगों के मन में उतरने को आतुर है, लेकिन उसके लिए जिस वातावरण की आवश्यकता है उसका निर्माण करने के लिए समूह साधना का यह विशिष्ट प्रयोग किया जा रहा है। छोटे-बड़े समूहों में एक साथ बैठकर की गयी साधना और प्रार्थना साधकों के नकारात्मक चिंतन को हटाकर उन्हें आत्म परिष्कार के लिए प्रेरित करेगी। लोगों में सकारात्मक चिंतन बढ़ेगा, परस्पर मतभेद मिटेंगे। सामाजिक बुराइयों पर विजय प्राप्त करने से पहले जरूरी है अपनी बुराइयों पर विजय प्राप्त कर आत्मा को निर्मल और सबल बनाना। दिव्य चेतना के अवतरण के लिए आवश्यक वातावरण बनाने का यह एक महान प्रयोग सिद्ध होगा।     संस्था की अधिष्ठात्री आदरणीया शैल जीजी अपने संदेश में कहा कि समूह साधना से परस्पर मन मिलेंगे, आत्मीयता बढ़ेगी तो उस भाव संवेदना का भी विकास होगा, जिसके अभाव में स्वार्थ-संकीर्णता बढ़ती जा रही है। भाव संवेदनाओं का जागरण ही आज की सारी समस्याओं का एकमात्र समाधान है। शांतिकुंज में नववर्ष के साथ समूह साधना के अनेक प्रयोग आरंभ कर दिये जायेंगे। - वहाँ के प्रत्येक कार्यालय में कामकाज आरंभ करने से पहले सभी कार्यकर्त्ता 5 से 10 मिनट की सामूहिक साधना के अंतर्गत मौन मानसिक जप, ध्यान और मानवमात्र के कल्याण के लिए प्रार्थना का दैनिक क्रम आरंभ कर देंगे। - वहाँ चलने वाले प्रत्येक शिविर की प्रत्येक कक्षा का आरंभ 2 से 5 मिनट की मौन प्रार्थना से होगा। - संस्कार, संगोष्ठियों के आरंभ में भी सामूहिक साधना होगी। - देव संस्कृति विश्वविद्यालय और गायत्री विद्यापीठ में प्रार्थना सभा में और कक्षाओं के आरंभ में मौन जप-प्रार्थना का क्रम आरंभ हो जायेगा। देश-विदेश में             सामूहिक साधना वर्ष अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत गायत्री परिवार के लोग समाज के सभी वर्गों के लोगों से मानवमात्र के कल्याण के लिए ऐसे आध्यात्मिक प्रयोग करने का अनुरोध करेंगे। - गायत्री शक्तिपीठों, शाखाओं द्वारा विशेष साधना शिविरों, साधना अनुष्ठानों का आयोजन होगा। दैनिक या साप्ताहिक विशेष साधना प्रयोग किये जायेंगे। - घर, दुकान, कार्यालय, सार्वजनिक स्थान, शैक्षिक संस्थान, सभा-संगोष्ठियों में भी लोग अपनी आस्था के अनुरूप अपने इष्टमंत्र, नाम का जप करते हुए मानवमात्र के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना का क्रम आरंभ करें, इसके लिए व्यापक आन्दोलन चलाया जायेगा। /* Style Definitions */ table.MsoNormalTable {mso-style-name:"Table Normal"; mso-tstyle-rowband-size:0; mso-tstyle-colband-size:0; mso-style-noshow:yes; mso-style-priority:99; mso-style-parent:""; mso-padding-alt:0in 5.4pt 0in 5.4pt; mso-para-margin-top:0in; mso-para-margin-right:0in; mso-para-margin-bottom:10.0pt; mso-para-margin-left:0in; line-height:115%; mso-pagination:widow-orphan; font-size:11.0pt; font-family:"Calibri","sans-serif"; mso-ascii-font-family:Calibri; mso-ascii-theme-font:minor-latin; mso-hansi-font-family:Calibri; mso-hansi-theme-font:minor-latin; mso-bidi-font-family:"Times New Roman"; mso-bidi-theme-font:minor-bidi;}


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