विद्यार्थी कुछ समय समाज सेवा के लिए भी निकालें- राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी देवसंस्कृति विश्वविद्यालय  के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में 1370 छात्रों को उपाधियां साहित्यकार नरेन्द्र कोहली और मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी समारोह में शामिल कुलाधिपति प्रणव पण्ड्या ने भावी योजनाओं पर डाला प्रकाश् |
 
हरिद्वार, 09 दिसम्बर। शिक्षा पूरी करने के बाद विद्यार्थियों को रोजगार से पहले कुछ समय समाज सेवा के लिए निकालना चाहिए इससे विद्यार्थी में अपने विषय की उपयोगिता के बोध के साथ सामाजिक दायित्व निभाने की भावना भी जागेगी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यह बात देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में कही। समारोह में उत्तराखण्ड के राज्यपाल अजीज कुरैशी, मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, राज्य के कई मंत्री और विधायक भी मौजूद थे। उन्होंने विश्वविद्यालय की कार्य पद्धति और व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा किइस संस्थान की वित्तीय जरूरतें लोगों के अंशदान और सहयोग से पूरी होती है। यह बड़ी बात है और प्रेरक उदाहरण है। राष्ट्रपति महोदय ने 1370 डिग्रिधारियों को उपाधियां प्रदान की। इनमें  77 डाक्टरेट उपाधि एवं विभिन्न विषयो के 32 स्वर्ण पदक धारक भी हैं। परम्परागत तरीके से संपन्न दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि असली प्रतिभाएं वे होती हैं , जो अपने लिए स्वयं अवसर निर्मित करती हैं।

परम्परागत तरीके से संपन्न दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि असली प्रतिभाएं वे होती हैं , जो अपने लिए स्वयं अवसर निर्मित करती हैं।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलाधिपति डा. प्रणव पण्ड्या ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय को शांतिनिकेतन की नवीन संस्करण बताते हुए कहा कि यहां पढ़ने वाला प्रत्येक विद्यार्थी जीवन में स्वावलम्बी बने यह हमारा लक्ष्य है। इस उद्देश्य का लघुप्रयोग ‘उपार्जित करो और शिक्षित बनो‘ कांसेप्ट यहां की शिक्षण पद्धति के साथ जोड़ा गया है। उन्होंने उत्तराखण्ड राज्य के गांवो, यहां की महिलाओं एवं युवाओं की सामाजिक, पारिवारिक समस्याओं के समाधान के विश्वविद्यालय के माध्यम से सार्थक प्रयास का संकल्प व्यक्त किया। साथ ही संपूर्ण उत्तराखण्ड के गांव-गांव में स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न प्रकल्प विकसित करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में एक आर एण्ड डी केंद्र (R.N.D Center) की व्यवस्था करने की बात कही।

 उन्होंनेhttp://news.awgp.org/var/news/117/dss.jpg" height="160" width="299"> पत्रकार वर्ग को समाज एवं देश की रीढ़ बताते हुए विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आशावादी पत्रकारों के निर्माण का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने पास आउट छात्रों का अभिभावकत्व व्यक्त करते हुए कहा यह विश्वविद्यालय उपर्युक्त आदर्शवादी अवधारणाओं की लघु प्रयोगशाला है। इसी क्रम मे मुझे  विश्वास है कि इससे छात्र अपने राष्ट्रीय और सामाजिक कर्तव्य अच्छी तरह निभाने मे सफल होंगे। डा. पण्ड्या ने गंगा विषय पर शोध कार्य के लिए छात्रा को बधाइर भी दी।

समारोह में राज्यपाल अजीज कुरैशी ने देवसंस्कृति विश्वविश्वविद्यालय के छात्रों को समाज मे छायी समस्याओं से निजात दिलाने हेतु प्रेरणाएं दी तथा विश्वास व्यक्त किया कि इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी नये सूरज को जन्म देंगे। देश में प्रजातांत्रिक, प्रगतिशीलता एवं शोषणविहीन समाज की रचना होगी।

मुख्यमंत्री महोदय ने आचार्य जी को प्रखर गांधीवादी बताते हुए कहा कि आचार्य जी ने जिस नई राष्टीय शक्ति का निर्माण जीवन भर किया उसी का साक्षात स्वरूप यहां दिखाई दे रहा है। उन्होने इस विश्वविद्यालय की दिव्य सांस्कृतिक अवधारणा की सराहना करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय को उत्तराखण्ड के लिए गौरव बताया।

कुलपति एस डी शर्मा ने विश्वविद्यालय की बीते 10 वर्षों की प्रगति का व्यौरा प्रस्तुत किया। प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पण्ड्या ने विद्यार्थियों को उपाधि हेतु प्रस्तुत किया। जिनमें प्रत्येक वर्ष तीन वर्षों में क्रमशः 2010 के लिए नैदानिक मनोविज्ञान की हिमानी आनन्द, 2011 के लिए गोपाल कृष्ण शर्मा, कम्प्यूटर साइंस, एवं 2012 के लिए उपासना सारस्वत, कम्प्यूटर विज्ञान को विश्वविद्यालय स्तर की प्रवीण्य सूची के लिए स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त कुलाधिपति महोदय ने डिगी प्रदान करते हुए छात्रों को दुर्बलता त्यागकर सत्य पर चलने एवं उस पर आरूढ होने का संकल्प व्यक्त कराया।


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