Published on 2017-12-23

शांतिकुंज द्वारा गोमुख से गंगा सागर तक गंगा की पवित्रता और अविरलता बनाये रखने के लिए आरंभ किये गये निर्मल जन गंगा अभियान का दूसरा चरण आशातीत सफलता के साथ 25 फरवरी को सम्पन्न हुआ। इस अभियान ने गंगा से जुड़ी जन-जन की आस्थाओं को मुखरित होने का अवसर दिया। विकास की आड़ में गंगा प्रदूषण के प्रति लोगों की आहत भावनाएँ अभिव्यक्त हुईं। हजारों-लाखों लोगों में गंगा प्रदूषण को दूर करने में सहयोगी बनने इच्छाओं को पूरा करने का सुयोग बना। हर नगर, हर डगर पर हर-हर गंगे के नारे गूँज उठे। इसी जन उत्साह के परिणाम स्वरूप दूसरे चरण के अगले अभियान के कार्यक्रम भी बड़े पैमाने पर बन गये, जो संभवतः पहले चरण से कई गुना अधिक व्यापक और प्रभावशाली होंगे। गंगा केवल नदी नहीं, करोड़ों भारतवासियों की माँ है। इसमें जन नहीं, जनभावनाएँ प्रवाहित होती हैं। यह हमारी आस्था और संस्कृति की संवाहक है। ‘हर-हर गंगे’ के उद्घोष के साथ हर देशवासी में शिव संकल्प जाग्रत् हो उठते हैं, जो मन और आत्मा को पवित्रता प्रदान करते हैं। निर्मल गंगा जन अभियान के दूसरे चरण में कुल नौ टोलियाँ शांतिकुंज से रवाना की गयीं। दो माह के समय में इनके माध्यम से उद्गम से संगम तक गंगा के दोनों तटों पर गंगा संवाद कथाओं के 150 से अधिक कार्यक्रम आयोजित हुए। जहाँ कार्यक्रम हुए और जहाँ-जहाँ से टोलियाँ गुजरीं लोगों में ‘हर-हर गंगे’ के नारों के साथ हर नगर-हर डगर गुंजायमान होता चला गया। गंगा मैय्या के आँचल को पावन बनाने के लिए लोगों में शिव संकल्प उभारे गये। गंगा को निर्मल बनाने के लिए उन्हें कार्यक्रम बताये गये, संकल्प जगाये गये। वहाँ के उत्साही लोगों को साथ लेकर उनके गंगा सेवा मंडल बनाये गये। कार्यक्रमों का स्वरूपप्रत्येक कार्यक्रम तीन दिवसीय था। पावर पॉइंट प्रेजेण्टेशन, गंगा की वर्तमान दुर्दशा बताती शांतिकुंज द्वारा तैयार की गयी फिल्म, इससे संबंधित तमाम प्रचार सामग्री, गंगा चालीसा आदि के माध्यम से गायत्री परिवार ने गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने के अपने संकल्प और योजनाओं से लोगों को अवगत कराया। प्रथम दिन ‘गंगा कथा’ के माध्यम से संस्कृति की संवाहक गंगा की महत्ता सरस पौराणिक कथानकों के साथ बतायी गयी। दूसरे और तीसरे दिन दिनभर जनसंपर्क, जनजागरण और स्वच्छता के कार्यक्रम हुए। टोलियों ने क्षेत्रीय संगठनों, गंगा स्वच्छता अभियान से जुड़े महानुभावों, प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया और उन सबसे गंगा स्वच्छता के लिए एकजुट होकर प्रयास करने का आह्वान किया गया। सायंकाल गंगा की व्यथा कथा के माध्यम से बताते हुए लोगों में निर्मल गंगा जन अभियान में भागीदारी के संकल्प जगाये गये। संस्कृति और समाज के प्रति जागरूक और सेवाभावी लोगों को साथ लेकर ‘गंगा सेवा मंडल’ बनाये गये। इन सेवा मंडलों को अपने क्षेत्र में गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए जनजागरूकता बढ़ाने के अभियान सतत चलाते रहने का आह्वान किया गया है। ये सभी शांतिकुंज के सीधे संपर्क में रहकर आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त करते रहेंगे। कार्यक्रमों में अनेक लोगों ने अपने क्षेत्र में गंगाशुद्धि का संदेश जन-जन तक पहुँचाने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया है। वे लोगों को गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने में पूरा-पूरा सहयोग करने के संकल्प दिलायेंगे। कुल आठ लाख से अधिक लोगों से ऐसे संकल्प पत्र भराने का आश्वासन 150 कार्यक्रमों में मिला।सबका सहयोग मिलागंगा प्रदूषण एक राष्ट्रीय समस्या है। इसे दूर करने के लिए आरंभ किये गये निर्मल गंगा जन अभियान ने गायत्री परिवार को एक नयी पहचान दी है। हर क्षेत्र, हर वर्ग, हर वय के नर-नारी बड़े उत्साह के साथ इसमें सक्रिय सहयोग कर रहे हैं। उन सब में गंगा प्रदूषण को दूर करने की चाह थी, गायत्री परिवार की पहल ने संगठित प्रयासों से समस्या के निवारण का विश्वास जगाया है। अनेक संगठन परस्पर सहयोग करते हुए इस अभियान में सक्रिय हो गये हैं। टोलियों ने अपने जनसंपर्क अभियान में मठ, गुरुद्वारे, मंदिर, मस्जिद सभी जगह संपर्क किया। ऐसे स्थानों पर सामूहिक स्वच्छता अभियान चलाया गया। हर कार्यक्रम में प्रतिदिन गंगा तट की स्वच्छता, गंगा आरती-अभिषेक का समावेश था।  प्रशासनिक अधिकारियों में गायत्री परिवार को सहयोग करने का भरपूर उत्साह देखा गया। सभी अपनी-अपनी तरह से सहयोग प्रदान कर अभियान को सफल बनाने के लिए उत्साहित हैं। प. बंगाल ने गंगा स्वच्छता अभियान के लिए एक क्रूज गायत्री परिवार को उपलब्ध कराया है।राष्ट्रीय महत्त्व के इस अभियान को प्रोत्साहित करने में हर स्थान पर मीडिया ने भरपूर सहयोग दिया। दूसरा चरण, द्वितीय भागगंगा संवाद कथा आयोजनों की सफलता ने यह जनसंपर्क अभियान सतत चलाते रहने का उत्साह कई गुना बढ़ाया है। कार्यक्रमों में जो नये उत्साही परिजन संपर्क में आये, उनके माध्यम से प्रत्येक अंचल में नये कार्यक्रमों की शृंखला तैयार हो रही है। ऐसे परिजनों को शांतिकुंज बुलाकर आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दूसरे चरण के दूसरे अभियान में भी उनके द्वारा १५० से २५० कार्यक्रम सम्पन्न कराने की रूपरेखा तैयार हुई है। उल्लेखनीय-उत्साहवर्धकटिहरी (उत्तराखंड) के कार्यक्रम में साध्वी उमा भारती पधारीं। उन्होंने कहा-शासकीय कार्यक्रमों में तो गंगा सफाई भाषणों तक ही सीमित हो जाती है। गायत्री परिवार ने पहल की है तो यह कार्य अवश्य ही पूर्णता तक पहुँचेगा।  बबराला, बदायूँ (उ.प्र.) के एक विद्यालय ने वृक्षारोपण के संकल्प लिये।नरौरा, अलीगढ़ (उ.प्र.)- नरौरा परमाणु ऊर्जा केन्द्र के वैज्ञानिकों के साथ संगोष्ठी हुई। उन्होंने जुलाई में गंगा किनारे 1100 वृक्ष लगाने के संकल्प लिये। लखीसराय (बिहार) में स्थानीय रोटरी क्लब के सहयोग से कार्यक्रम आयोजित हुआ। वहाँ आयोजित संगोष्ठी में रेड क्रॉस सोसायटी, लायंस क्लब, माध्यमिक शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी भाग लिया और गंगा बचाओ अभियान में पूरे सहयोग का आश्वासन दिया। २४ सदस्यीय समिति का गठन किया गया। यह जिले के स्कूल-कॉलेजों में निर्मल गंगा जन अभियान और जल संरक्षण अभियान के लिए जनजागरूकता बढ़ायेगी।हाजीपुर (बिहार) की जनजागरण रैली उत्साहवर्धक थी। दो दिन तक गंगा सफाई, आरती के कार्यक्रमों में लोगों का भरपूर सहयोग मिला। स्कूलों के कार्यक्रम क्रांतिकारी सिद्ध हुए। पटना (बिहार) 21 जनवरी को पटना के गाँधी घाट पर स्वच्छता अभियान चला, जिसमें युवकों ने बड़े उत्साह से भाग लिया। नर-नारी, विधायक, बच्चे सभी सफाई अभियान में जुटे दिखाई दिये। वेदानंद मंडल, अजयकुमार, राजेन्द्र कुमार, दशरथ प्रसाद आदि ने छोटे-छोटे समूहों में गंगा सफाई के लिए जन चेतना जगायी, गंगा को स्वच्छ रखने के संकल्प दिलाये। गौतम अंचल की टोली द्वारा पटना के विभिन्न विद्यालयों-उच्च माध्यमिक विद्यालयों में उद्बोधन दिये गये।


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