प्रकृति की विकृति से ही समस्याएँ बढ़ीं: डॉ हेमवती नंदन देसंविवि में पृथ्वी का वातावरण एवं हमारा ब्रह्माण्ड पर राष्ट्रीय सेमीनार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज के मृत्युंजय सभागार में पृथ्वी का वातावरण एवं हमारा ब्रह्माण्ड पर राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन हुआ। इस आयोजन में भौतिकी व वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के अनेक मनीषियों ने विचार प्रकट किये। सेमीनार में देसंविवि, आईआईटी रुड़की, इंजीनियरिंग कॉलेज देहरादून व हरिद्वार के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से आये करीब 350 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ पर्यावरण बचाओ, धरती रही पुकार के सुमधुर गीत से हुआ। अपने संदेश में प्रखर अध्यात्मवेत्ता एवं देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि पृथ्वी हमारी माता है, हम उसके पुत्र हैं- यह वेद कहता है। हम यदि सचमुच माता मानते हैं, तो हमें प्रतिपल उसके प्रति संवेदनात्मक संबंध बनाए रखना चाहिए। कुलाधिपति ने कहा कि वस्तुतः पृथ्वी का भी एक दिल है, वह जब धड़कता है, तो मानव मात्र का भी उसके साथ स्पंदन होता है। यह मां- पुत्र का संबंध बना रहे, तो आज न पृथ्वी व उसका वातावरण प्रदूषित होगा और न ही उसकी प्रतिक्रिया विभीषिकाओं के माध्यम से देखने को मिलेंगी। देसंविवि के कुलपति डॉ एसडी शर्मा ने आर्टटिक लाइट एण्ड ऋग्वैदिक ऊषा विषय पर पावर पाइंट के माध्यम से विश्व ब्रह्माण्ड की विभिन्न सतहों की जानकारी दी। गुरुकुल कांगड़ी विवि के डॉ हेमवती नंदन ने कहा कि कई तरह के प्रदूषण बढ़ने के कारण ही प्रकृति में विकृतियाँ उत्पन्न हुई हैं। वातावरण एवं ब्रह्माण्ड को स्वच्छ रखने के लिए जन जन को जागरुक करना होगा। कार्यशाला के माध्यम से वातावरण व ब्रह्माण्ड में हो रहे बदलाव के बारे में जानने का यह एक सुंदर मौका है। कई देशों में अपने व्याख्यान दे चुके न्यूरोलॉजिस्ट डॉ आशुतोष ने अपने लंबे अनुभव को साझा करते हुए प्राचीन अध्यात्म व आधुनिकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। भौतिकी विज्ञानी डॉ नरेन्द्र सिंह, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय प्रबंधक सचिव जयंत सहस्राबुधे, डॉ छविपंत पाण्डेय, श्रीमती रश्मि उनियाल आदि ने भी विचार व्यक्त किये। सेमीनार के समन्वयक डॉ शांभवी मिश्रा के अनुसार प्रथम सत्र में वसुंधरा के चारों ओर का वातावरण तथा ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एवं विकास पर विचार- मंथन चला। वहीं द्वितीय सत्र में विश्व व ब्रह्माण्ड के विभिन्न तह का एनालिसिस करते हुए चर्चा की गई तथा ब्लेक होल, व्हाइट होल तथा वार्म होल पर विचार विमर्श किया गया। अंतिम व समापन सत्र में भौतिक विज्ञानियों ने धरती पर हो रहे प्रदूषण, समाज पर विज्ञान का बढ़ते प्रभाव एवं उसके दुष्परिणामों पर चिंता जाहिर करते हुए विज्ञान का एक सीमा तक कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत का देसंविवि पहला विवि है, जहाँ विज्ञान अध्यात्म पर बीए, बीएससी स्तर पर पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है।


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