सरदार पटेल की कर्मभूमि-बारडोली में हुतात्माओं का सम्मान२० शहीदों के परिवारों को दिया गया २-२ लाख रुपये का अनुदानहमारा समाज उन जाँबाज नौजवानों का सदा ऋणी रहेगा, जो अपने देश और देशवासियों की भलाई के लिए अपना सर्वोच्च त्याग-बलिदान करने में कभी पीछे नहीं रहते। उत्तराखंड की आपदा में हजारों लोग कालकवलित हो गये, लेकिन यह भी सच है कि कई हजार लोगों को ऐसे ही वीर जवानों की कर्त्तव्यनिष्ठा और सेवाभावना ने मौत के मुँह से निकाला है। दुर्भाग्य से एअरफोर्स, आईटीबीपी. और एनडीआरएफ. के २० जवान हैलीकॉप्टर दुर्घटना में शहीद हो गये। आज शहीद दिवस के अवसर पर कर्मयोगी सरदार पटेल की जन्मभूमि पर हम उन हुतात्माओं को भावभरी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। भीगी पलकें और भावभरे अंतःकरण के साथ कहे गये उपरोक्त शब्दों से अंतर्राष्ट्रीय गायत्री परिवार के प्रमुख आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने उन २० जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो गतवर्ष उत्तराखंड में आयी भीषण बाढ़ के समय चल रहे राहत कार्यों में एक हैलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के कारण शहीद हो गये थे। शहीद दिवस-२३ मार्च के दिन यह शहीद सम्मान समारोह थिंक टैंक ग्रुप ने अपने मिशन केदारनाथ-९९९ के अंतर्गत गायत्री परिवार के साथ मिलकर स्वराज आश्रम, बारडोली में आयोजित किया था। समारोह का शुभारंभ प्रज्ञागीत ‘‘औरों के हित जो जीता है ....’’ से हुआ। थिंक टैंक ग्रुप की ओर से श्री बाबूभाई पटेल ने आदरणीय डॉ. साहब का भावभरा सम्मान किया। तत्पश्चात संस्था प्रमुख डॉ. खुशाल देसाई ने अपनी संस्था और मिशन केदारनाथ-९९९ की जानकारी दी। आदरणीय डॉ. साहब ने शहीदों को सम्मान दिये जाने के इन क्षणों में भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु के बलिदान तथा सरदार पटेल की देशभक्ति को अंतःकरण से प्रणाम किया।  उन्होंने कहा कि सरदार पटेल द्वारा इस आश्रम से आरंभ किया गया स्वराज आन्दोलन आज भी लोगों में त्याग, समर्पण, सेवा की भावना जगा रहा है। शांतिकुंज प्रतिनिधि ने कहा शहीदों के परिवारों ने जो खोया है, उसकी भरपायी किसी भी तरह से नहीं की जा सकती, लेकिन देशवासियों का उनके प्रति सम्मान का भाव ही उनमें सेवा तथा सर्वोच्च बलिदान की उमंग जगाता है। आपदा प्रबंधन कार्य में लगे जवानों की प्रशंसा करते हुए आदरणीय डॉ. साहब ने कहा कि आपदा के दिनों शांतिकुंज ने प्रतिदिन लाखों भोजन के पैकेट तैयार किये। उन्हें इन जवानों के सहयोग से ही पीड़ितों तक पहुँचाया जा सका।इस समारोह में करुणा फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री धर्मेश पटेल ने आयोजन के संचालन और गायत्री परिवार के साथ सतत संपर्क बनाये रखने में प्रमुख योगदान दिया। शांतिकुंज की ओर से थिंक टैंक ग्रुप के साथ समन्वय स्थापित कर रहे आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ प्रभारी श्री राकेश जायसवाल, सर्वश्री सूरज प्रसाद शुक्ला, संतोष सिंह, नरेन्द्र पाटीदार, हरिप्रसाद चौरसिया, बसंत यादव, नारायण रघुवंशी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।  शहीद सम्मान समारोह थिंक टैंक ग्रुप के मिशन केदारनाथ-९९९ के अंतर्गत  आयोजित किया गया। शहीदों के परिवारी जनों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, शॉल और दो लाख रुपये का चैक भेंट करते हुए सम्मानित किया गया।  आर्थिक सहायता की व्यवस्था थिंक टैंक ग्रुप द्वारा की गयी थी। प्रस्तुत समारोह में थिंक टैंक ग्रुप की ओर से शांतिकुंज को ५१ लाख रुपये भेंट किये गये, जो मिशन केदारनाथ-९९९ की योजनाओं में लगाये जायेंगे।  थिंक टैंक ग्रुप गुजरात के श्रीमंत भावनाशीलों का एक समूह है जो नाम-यश की कामना से ऊपर उठकर पीड़ितों की सेवा में लगा है। केदारनाथ की आपदा के समय वे शांतिकुंज में रहे। आदरणीय डॉ. साहब-जीजी के साथ आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ प्रभारी आदरणीय श्री गौरीशंकर शर्मा जी, श्री हरीश ठक्कर जी के सीधे संपर्क में रहे। यहाँ की कार्ययोजना और भावनाओं से प्रभावित डॉ. खुशाल देसाई ने बारडोली के समारोह में भावनाशीलों से गायत्री परिवार के जुड़ने का आह्वान भी किया। थिंक टैंक ग्रुप और गायत्री परिवारथिंक टैंक ग्रुप ने गतवर्ष केदारनाथ में आयी बाढ़ के समय गायत्री परिवार के कार्यकर्त्ताओं की सहायता से पीड़ितों की सेवा का सशक्त अभियान चलाया था। उन्होंने हजारों लोगों के लिए कपड़े, भोजन, बरतन, राशन आदि की व्यवस्था की थी, जिसे शांतिकुंज के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के सहयोग से पीड़ितों तक तत्काल पहुँचाया गया। मिशन केदारनाथ-९९९इस स्वयंसेवी संगठन ने ९९९ दिनों तक जरूरतमंदों का सहयोग करते रहने का संकल्प लिया है। इसी मिशन केदारनाथ-९९९ के अंतर्गत दुर्घटनाग्रस्त हैलीकॉप्टर में शहीद हुए जवानों का सम्मान करने और सहायता देने के लिए यह समारोह आयाजित किया गया था।थिंक टैंक ग्रुप ने उत्तराखंड के सारी एवं नागडाडा गाँव को गोद लिया है। इन गाँवों में स्कूल, सामुदायिक भवन, मकान आदि का निर्माण भी कराया जा रहा है। ‘मिशन केदारनाथ-९९९’ के अंतर्गत थिंक टैंक ग्रुप इन गाँवों को सेवा-सहायता प्रदान करता रहेगा। बच्चों की शिक्षा के लिए पुस्तक, गणवेश, भोजन तथा गाँव वासियों के लिए सोलार पैनल से लाइट की व्यवस्था आदि बनायी जा रही है।  शांतिकुंज का आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए तकनीकी सहयोग के साथ कार्यकर्त्ता उपलब्ध करा रहा है। शांतिकुंज द्वारा गाँववासियों को स्वावलम्बी बनाने के लिए रोजगार प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी है। उन्हें सुविचार, संस्कार व साहस दिलाने के लिए कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं।   शहीदों के परिवारों ने जो खोया है, उसकी भरपायी किसी भी तरह से नहीं की जा सकती, लेकिन देशवासियों का शहीदों के प्रति सम्मान का भाव ही उनमें सेवा तथा सर्वोच्च बलिदान की उमंग जगाता है।   - डॉ. प्रणव पण्ड्या जीएक चमत्कार ही है गायत्री परिवार की सेवा भावना  - डॉ. खुशाल देसाईउन्होंने गायत्री परिवार से मिले सहयोग पर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ कहा कि विश्व में गायत्री परिवार के ५ करोड़ लोगों का इन समर्पित भावनाओं के साथ समाज सेवा में लगना एक चमत्कार ही है। लक्सर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में प्रत्यक्ष देखे गायत्री परिवार के कार्य का विवरण करते हुए उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार के पढ़े-लिखे लोगों ने बोटों और गारा-गोबर में जाकर  गाँव-गाँव हर व्यक्ति तक सेवा-सहायता पहुँचायी है। 
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