वडोदरा के शिविर में ११ तहसीलों के ११०० कार्यकर्त्ताओं की भागीदारी

शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी की गरिमामय उपस्थिति में कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण एवं शक्ति साधना शिविर के दो संगठन प्रधान विशाल आयोजन सम्पन्न हुए। उन्होंने युग निर्माण आन्दोलन में सक्रिय योगदान देने के लिए उत्साहित कार्यकर्त्ताओं को संगठित प्रयासों से बेहतर सफलता के सूत्र सिखाये। इसमें आसपास के ११ तहसीलों के कार्यकर्त्ता भाई-बहिनों ने भाग लिया।

कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण शिविर

२५ से २८ मार्च की तारीखों में लाड भवन में आयोजित कार्यकर्त्ता शिविर में लगभग १००० भाई-बहिनों ने भाग लिया। शांतिकुंज प्रतिनिधि सुश्री दीनाबेन त्रिवेदी ने इसे संबोधित करते हुए नारी जागरण का क्रांतिकारी संदेश दिया। उन्होंने कर्मकाण्ड, संस्कार आदि का प्रशिक्षण दिया, वहीं श्री प्रताप शास्त्री एवं श्री गणेश पंवार ने ढपली और गायन का प्रशिक्षण दिया। देसंविवि की योग शिक्षिका कु. विंध्यवासिनी शर्मा और कु. जानकी जोशी ने आसन, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर, आहार संयम जैसे स्वास्थ्य रक्षा से सूत्र सिखाये।

प्रशिक्षणार्थियों में बहिनों की संख्या ही अधिक थी।
शक्ति साधना शिविर

 गायत्री शक्तिपीठ खटंबा पर २९ एवं ३० मार्च को विशाल शक्ति साधना शिविर का आयोजन हुआ, लगभग ११०० लोगों ने इसमें भाग लिया। नवरात्रि साधना से पूर्व आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी से मिला मार्गदर्शन और ध्यान का अभ्यास उपस्थित साधकों के लिए संजीवनी के समान था।

शांतिकुंज प्रतिनिधि ने अनेक सूत्रों की व्याख्या इन दो दिनों में करते हुए साधना के सही उद्देश्य और उसके सही स्वरूप की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जप जैसे कर्मकाण्ड कर लेना ही साधना नहीं है। साधना समग्र होती है। साधना से शरीर सधता है, मन एकाग्र होता है, भावनाएँ परिष्कृत होती है। साधना से सद्गुण सधेंगे और संगीत भी सधेगा।

साधक को सदा यह प्रयास करना चाहिए कि मैं आज जो हूँ, कल उससे बेहतर बनूँ। आत्म समीक्षा को उन्होंने अहंता और हीनता से बचने का माध्यम बताया। गुरुदेव के जीवन की सफलताओं और उनके लिए की गयी साधनाओं का वर्णन करते हुए श्रोताओं को रोमांचित कर दिया।

सुश्री दीनाबेन त्रिवेदी ने सत्संकल्पों की व्यख्या की। आदरणीय श्री उपाध्याय जी ने ‘अपने अंग-अवयवों से’ पत्रक पर प्रकाश डाला मिशन के विराट स्वरूप और महान उद्देश्यों से साधकों को अवगत कराया। शांतिकुंज की टोली के सहयोगी श्री प्रताप शास्त्री एवं श्री गणेश पंवार ने अपने युगसंगीत से जनभावनाओं में सरस प्रेरणाओं युक्त भक्तिभाव का संचार किया।

आदरणीय श्री उपाध्याय जी

साधना जीवन की परम आवश्यकता है। आत्मबल अर्जित करने के लिए जैसे मंत्रजप, ध्यान, प्राणायाम जैसी साधनाओं की जरूरत है, वैसे ही संगठन की सफलता के लिए एक-दूसरे से मीठा बोलने, सत्कार्यों की प्रशंसा करने जैसे सद्गुणों का अभ्यास करने की साधना निरंतर करते रहना भी जरूरी है।

युग निर्माण आन्दोलन एक सामाजिक आन्दोलन है। इसकी सफलता के लिए कार्य के अनुरूप योग्यता हासिल करने के साथ हर व्यक्ति की योग्यता के सुनियोजन की भी आवश्यकता है।

सुश्री दीनाबेन त्रिवेदी
नारी अपनी जाग्रत् भाव संवेदनाओं से घर, परिवार और समाज को स्वर्ग बना देती है, यह तथ्य सीता, सावित्री, अनुसुइया, गार्गी जैसी अनेक देवियों का इतिहास यह सिद्ध करता है। परम पूज्य गुरुदेव, परम वंदनीया माताजी से प्रोत्साहन पाकर आज की नारी फिर से वही इतिहास दोहरा रही है।






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