निर्मल गंगा जन अभियान का तृतीय चरण का शुभारंभ गोमुख से गंगासागर तक तीन सौ से अधिक गंगा प्रज्ञा सेवा मंडल का गठन

Published on 2017-12-23

शांतिकुंज द्वारा चलाए जा रहे निर्मल गंगा जन अभियान के अंतर्गत गायत्री तीर्थ में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। इसका उद्देश्य पिछले दो वर्ष से चल रहे गंगा शुद्धि अभियान के कार्यक्रमों की समीक्षा करना एवं अगली कार्ययोजना के साथ अभियान की विस्तार पर चर्चा करना था। अभियान से जुड़े स्वयंसेवकों की गंगा प्रज्ञा मण्डल नाम से तीन सौ से अधिक टीमें गठित की गयीं, जो इस अभियान से जुड़कर गंगा की पवित्रता एवं शुद्धिकरण के लिए चलाये जा रहे कार्यक्रमों में तन, मन, धन से जुटेंगे। एक टीम से दस से पच्चीस व इससे भी अधिक सदस्य तथा स्थानीय नागरिक शामिल होंगे। 

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में निर्मल गंगा जन अभियान के प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या ने तृतीय चरण के निर्मल गंगा जन अभियान के तृतीय चरण के स्वरूप पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मूल संकट पेयजल का है। गंगा आधा से ज्यादा देश को सींचती है और सफल कृषि का आधार बनती है। गंगा भारत के लिए एक दिव्य अनुदान है। इसकी रक्षा किसी भी स्थिति में की जानी चाहिए। यह एक विराट जन सहयोग, श्रद्धा भरा समन्वित पुरुषार्थ एवं अनवरत परिश्रम से ही होगा। निर्मल गंगा जन अभियान आने वाले बारह वर्षों में एक ऐसे भागीरथी पुरुषार्थ का नाम है, जो गंगा ही नहीं, देश व पड़ोसी देश नेपाल की सभी नदियों के जल को शुद्ध कर देगा। 

इससे पूर्व संगोष्ठी में उपस्थित प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा ने कहा कि हम स्वच्छ बनेंगे, तभी गंगा स्वच्छ होगी। अपने मन को पवित्र एवं शुद्ध बनाने से ही गंगा के प्रति स्वच्छता का भाव जागेगा। शांतिकुंज मनीषी श्री वीरेश्वर उपाध्याय ने कहा कि गंगा सभी को पवित्र बनाती है और  सबका उद्धार करती है इसलिए हमारा दायित्व है कि हम सभी मिलकर गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने में सहयोग करें। श्री कालीचरण शर्मा ने प्रतिभागियों को अनुशासन एवं मार्गदर्शन दिया। सागर मित्र संगठन महाराष्ट्र के वरिष्ठ प्रतिनिधि विनोद बोधनकर एवं शैलेन्द्र जी ने पर्यावरण संरक्षण पर अपने अनुभव बांटे। साथ ही शांतिकुंज के कई अन्य वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। 

निर्मल गंगा जन अभियान से जुड़े श्री केदार प्रसाद दुबे जी ने बताया कि अब तक अभियान के तहत सर्वेक्षण व गंगा संवाद के माध्यम से जनजागरण के कार्य पूरा किया  जा चुका है। तृतीय चरण के तहत गोमुख से गंगासागर के बीच नौ अंचल में अमृत गंगारथ के माध्यम से जनजागरण का क्रम सम्पन्न होगा। गंगा तटों की स्वच्छता अभियान एवं वृहत स्तर पर पौधारोपण का कार्य किया जायेगा। गंगा मैया के निकटस्थ स्थानों के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के युवाओं को भी इस आंदोलन में जोड़ा जायेगा, जिससे इन युवाओं के बीच मां गंगे के प्रति आस्था का भाव जागे। सभी ने गंगा तट पर ध्यान किया एवं अर्ध्य देकर अभियान की सफलता का आशीर्वाद माँगा।


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