Published on 2017-12-23

  • ‘निर्मल गंगा जन अभियान’ के तृतीय चरण की तैयारी हेतु राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न
निर्मल गंगा जन अभियान का तीसरा चरण आगामी सितम्बर माह से पुनः आरंभ हो रहा है। इसकी तैयारियों के संदर्भ में दिनांक ३०, ३१ मई को शांतिकुंज में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। विगत चरणों में सक्रिय योगदान देने वाले और उस चरण से प्रभावित होने वाले स्वयं सेवकों ने इसमें भाग लिया। विगत चरणों की कार्ययोजना और उभरे उत्साह की समीक्षा हुई। उसी आधार पर आगामी चरण की योजना तैयार की गयी। 

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वरिष्ठ जनों से मिला मार्गदर्शन
सर्वोपरि राष्ट्रहित की इस योजना के महत्त्व पर आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने प्रकाश डाला। आदरणीय श्री गौरीशंकर शर्मा जी ने लोगों के मन और विचारों के परिवर्तन को योजना की सफलता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि स्वभाव और संस्कार बदलने से मिली सफलता ही टिकाऊ हो सकती है। 

श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी ने माँ से जुड़े दायित्वों की याद दिलायी। उन्होंने कहा कि करोड़ों-अरबों के मनों में पवित्रता का संचार करने वाली माता आज संकट में है तो उसके संकट को दूर करने का, उसे स्वच्छ बनाने का नैतिक दायित्व बच्चों का ही है। श्री कालीचरण शर्मा जी ने अभियान की सफलता के महत्त्वपूर्ण सूत्र दिये। 

द्वितीय चरण की शानदार सफलता
संगोष्ठी संयोजक और अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक श्री के.पी. दुबे ने प्रथम और द्वितीय चरण से उभरे उत्साह की बानगियाँ प्रस्तुत कीं। उन्होंने द्वितीय चरण में गोमुख से गंगासागर तक की लम्बाई पर दसों अंचलों में सक्रिय टोलियों के माध्यम से २०० से अधिक तीन दिवसीय गंगा संवाद कार्यक्रम आयोजित होने की जानकारी दी। इनमें कथा के माध्यम से, गंगा प्रदूषण को लेकर बनी लघु फिल्म के माध्यम से, पावर पॉइंट प्रेजेण्टेशन के माध्यम से लोगों तक गंगा की व्यथा पहुँचायी गयी। 

विषयवस्तु हृदय को छूने वाली थी, परिणाम स्वरूप लोगों का भी भरपूर सहयोग मिला। इन कार्यक्रमों ने समाज के हर वर्ग में गंगा स्वच्छता अभियान में सक्रिय सहयोग का उत्साह जगाया है। उन्होंने बताया कि हर क्षेत्र में हर वर्ग के लोगों के बीच ३५० से अधिक ‘गंगा सेवा मंडल’ गठित हुए हैं। अधिकारी, पत्रकार, वैज्ञानिक, ङ्क्षहदू, मुस्लिम, सिक्ख आदि अनेक वर्गों ने गंगा सेवा मण्डलों का गठन किया है। वृक्षारोपण के संकल्प भी हजारों की संख्या में हुए। १० लाख से अधिक व्यक्तियों ने गंगा प्रदूषण न करने तथा दूसरों को करने से रोकने का संकल्प लिया। 

तीसरे चरण की योजना
तीसरे चरण में ‘अमृत गंगा रथ’ और उसके साथ पदयात्राओं से जनजागरण की योजना बनायी गयी है। पिछले चरण में बने गंगा सेवा मंडलों के माध्यम से ही इनके कार्यक्रमों का नियंत्रण-निर्धारण होगा। 

पाँचों अंचलों में एक साथ पाँच अमृत गंगा रथ यात्राएँ निकाली जायेंगी। प्रत्येक के साथ साईकिल, मोटर साईकिल और पदयात्रियों की टोलियाँ चलेंगी। एक रथ द्वारा प्रतिदिन १० कि.मी. यात्रा करने की योजना बनायी गयी है। यह यात्राएँ गंगातट के प्रत्येक गाँव-नगर में पहुँचेंगी। 

अमृत गंगा रथयात्राओं के माध्यम से जन-जन में जागरूकता बढ़ाने, आदतों को बदलने और उन्हें नियमित अभ्यास में लाने के लिए प्रेरित करने के प्रयास किये जाने हैं। जगह-जगह स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, दीवार लेखन, सभा-संगोष्ठियाँ, जन संपर्क जैसे कार्यक्रम भी यात्राओं के साथ जुड़े रहेंगे। 

गंगा भारत के लिए एक दिव्य अनुदान है। यह उत्तरी भारत की जीवन रेखा ही नहीं, सनातन संस्कृति की संवाहक है, युगों-युगों से करोड़ों लोगों की आध्यात्मिक आस्थाओं की पोषक है। इसकी रक्षा किसी भी स्थिति में की जानी चाहिए। 

निर्मल गंगा जन अभियान केवल गंगा ही नहीं, भारत और पड़ौसी देश नेपाल की सभी नदियों, जलाशयों को शुद्ध करने का १२ वर्षीय भागीरथी पुरुषार्थ का एक विराट अभियान है। यह जन-जन की जागरूकता और नैष्ठिक पुरुषार्थ और श्रद्धासिक्त सहयोग से ही सफल हो सकता है।           
 - आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी

गंगा को निर्मल करने के लिए सबसे पहले लोगों के मनों को निर्मल करना आवश्यक है। मन स्वच्छ होंगे तो लोगों की संवेदना जागेगी। संवेदना जागे तो जीवनदायिनी, करोड़ों लोगों की भावनाओं का पोषण करने वाली माँ गंगा को अपवित्र करना कैसे संभव हो सकता है?
   - आदरणीय श्री गौरीशंकर शर्मा जी



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