माँ भगवती गंगा को निर्मल बनाने के अभियान में शांतिकुंज को मिला...

Published on 2017-12-23
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  • सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं का सहयोग
  • निर्मल गंगा जन अभियान विधि प्रकोष्ठ की स्थापना हुई
अधिवक्ताओं की प्रतिक्रियाएँ
श्री वी. शेखर, उपाध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ः
  •  मैं स्वयं पर्यावरण संरक्षण के लिए बहुत उत्साहित हूँ और प्रयत्नशील हूँ। यहाँ आकर प्रदूषण दूर करने के लिए एक नयी अवधारणा मिली-लोगों के मस्तिष्क में फैले प्रदूषण को हटाना। इससे मैं बहुत उत्साहित और आश्चर्यचकित हूँ। 
श्री चंद्रशेखर आसरी ः 
  • हम गंगा को गंदा कर सकते हैं तो उसे साफ भी कर सकते हैं। यह निश्चित रूप से संभव है। 
श्री प्रदीप धींगरा ः
  •  सन् २००५ से गुरुदेव से उनके साहित्य के माध्यम से जुड़ा। जैसे-जैसे उनका साहित्य पढ़ता गया, वैसे-वैसे आंतरिक गंगा में परिवर्तन आता गया। मैं अपने क्लाइंट्स को भी गुरुदेव की पुस्तक पढ़ाता हूँ और उनमें भी परिवर्तन देखता हूँ। मुझे लगता है कि इस योजना में गुरुदेव के विचार निर्मल गंगा का आधार बनेंगे। 

देश के सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दो दिवसीय कार्यशाला १६ एवं १७ अगस्त की तारीखों में शांतिकुंज में आयोजित हुई। श्री वी. शेखर, उपाध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, श्री प्रशांत कुमार, सचिव अखिल भारतीय बार एसोसिएशन, श्री जी. चारी, श्री चंद्रशेखर जी, डॉ. आलोक शर्मा-इंटरनेशनल ज्यूरिस्ट जैसे गणमान्यों ने इसमें भाग लिया। दो दिवसीय विचार मंथन में सभी लोग शांतिकुंज के अभियान से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने निर्मल गंगा जन अभियान को अत्यंत व्यावहारिक और  वैज्ञानिक बताया। श्री वी. शेखर जी ने कहा-हम आश्वासन देते हैं कि इस अभियान के लिए हम अपना सर्वोच्च योगदान देंगे और आपकी अपेक्षाओं से कहीं अधिक सहयोग करेंगे। 

अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अनेक वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं ने शांतिकुंज के दृष्टिकोण और योजनाओं की जानकारी दी। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने कहा कि कोई भी अभियान बिना जनसहभागिता के सफल नहीं हो सकता। हमारे पास योजना है और जनजागरण की सामर्थ्य भी भरपूर है। माँ गंगे पर हो रहे असुरता के आक्रमण से उसे बचाने के लिए हमें आप जैसे विशेषज्ञों के सहयोग की आवश्यकता है। 

श्री कालीचरण शर्मा जी ने गुरुदेव की पंक्तियाँ दोहराते हुए कहा गया है कि गंगा हमारी सभ्यता, संस्कृति, पवित्रता की पहचान है। आज यह असभ्यता का अभिशाप झेल रही है। देश की आजादी के बाद मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है असभ्यता। गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए हमें इस असभ्यता को दूर करना होगा। 
आद. श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी, श्री केशरी कपिल जी, डॉ. बृजमोहन गौड़ जी, डॉ. ओ.पी. शर्मा जी आदि ने कार्यशाला को संबोधित किया। आन्दोलन प्रकोष्ठ प्रभारी श्री के.पी. दुबे ने निर्मल गंगा जन अभियान की योजना विस्तार से समझायी। सुप्रीम कोर्ट के ही अधिवक्ता मिशन के समर्पित कार्यकर्त्ता श्री जितेन्द्र सिंह के प्रयासों से यह कार्यशाला आयोजित हुई। 

कार्यशाला में विचार मंथन से देश के संविधान के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने और आवश्यक कानूनी जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘निर्मल गंगा जन अभियान विधि प्रकोष्ठ’ की स्थापना की गयी, आगामी कार्ययोजना बनी।


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